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Jaisalmer की धरा पर भक्ति का महासंगम: 872 वर्ष पुरानी ‘अक्षुण्ण चादर’ के होंगे दिव्य दर्शन, मोहन भागवत करेंगे महोत्सव का आगाज़

Jaisalmer
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Jaisalmer: स्वर्ण नगरी जैसलमेर आगामी 6 से 8 मार्च तक एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटनाक्रम की साक्षी बनने जा रही है। जैन समाज के महान युगप्रधान दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सुरिजी के पावन स्मृति और उनकी चमत्कारिक ‘चादर’ के सम्मान में भव्य चादर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

गच्छाधिपति पूज्य जिनमणिप्रभसुरिश्वरजी की पावन निश्रा में आयोजित इस महोत्सव में आस्था, श्रद्धा और जैन धर्म की गौरवशाली परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

चमत्कारिक इतिहास: अग्नि भी जिसे स्पर्श न कर सकी
इस महोत्सव का केंद्र वह पवित्र ‘चादर’ है, जिसके पीछे एक अत्यंत प्रेरणादायक और चमत्कारिक इतिहास जुड़ा है। अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप जैन ने इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:

  • 872 वर्ष पुराना रहस्य: मान्यता है कि विक्रम संवत 1211 (लगभग 872 वर्ष पूर्व) में जब दादा गुरुदेव का अग्निसंस्कार किया गया, तब उनकी देह तो पंचतत्व में विलीन हो गई, लेकिन उनकी चादर, चोल-पट्टा और मुंहपत्ति अग्नि के बीच भी पूरी तरह सुरक्षित और अक्षुण्ण रहे।
  • दिव्य दर्शन: इसी चमत्कारिक और पवित्र चादर के पूजन व अभिषेक के उपलक्ष्य में यह त्रि-दिवसीय महोत्सव आयोजित किया जाता है, जहाँ श्रद्धालुओं को इनके सार्वजनिक दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है।

दिग्गजों की मौजूदगी और भव्य तैयारियाँ
महोत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका नेतृत्व समाज और राजनीति के प्रमुख चेहरे कर रहे हैं।

  • मुख्य अतिथि: महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत की गरिमामयी उपस्थिति में होगा।
  • मार्गदर्शन: दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव समिति के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढा के मार्गदर्शन में पूरी रूपरेखा तैयार की गई है।
  • सहभागिता: श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ, मुंबई के अध्यक्ष गुलाबचंद जीरावला के अनुसार, देशभर से लगभग 200 साधु-साध्वियों और 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के इस समागम में जुटने की संभावना है।

अहिंसा और सदाचार का वैश्विक संदेश
यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य धर्म, संयम, अहिंसा और सदाचार के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। “यह आयोजन ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। दादा गुरुदेव की चादर हमारे लिए संयम और तप की शक्ति का प्रतीक है।” — प्रदीप जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, खरतरगच्छ युवा परिषद

महोत्सव के मुख्य आकर्षण: एक नज़र में

कार्यक्रम विवरणविवरण
अवधि6 से 8 मार्च
मुख्य निश्रागच्छाधिपति पूज्य जिनमणिप्रभसुरिश्वरजी
विशेष दर्शनदादा गुरुदेव की दिव्य चादर, चोल-पट्टा और मुंहपत्ति
प्रमुख उपस्थितिमोहन भागवत (सरसंघचालक, RSS)
स्थानजैसलमेर, राजस्थान

जैसलमेर का आकाश इन तीन दिनों तक मंत्रों की गूंज और भक्तों के जयकारों से गुंजायमान रहेगा। यह महोत्सव जैन समाज की एकता और प्राचीन भारतीय संस्कृति की जीवंतता का प्रमाण बनेगा।

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