~हरीश तिवारी
पालघर: आधुनिकता की दौड़ में जहां वैश्विक खाद्य प्रणालियां औद्योगिक प्रथाओं की ओर झुक रही हैं, वहीं महाराष्ट्र के पालघर स्थित इस्कॉन के गोवर्धन इकोविलेज (GEV) ने भारत की पारंपरिक जड़ों की ओर लौटने का एक शंखनाद किया है। अपने महत्वाकांक्षी अभियान ‘मेरी माटी मेरी थाली’ के तहत, GEV ने हाल ही में ‘नेटिव फ़ूड डे’ मनाया, जिसका मुख्य आकर्षण रहा—पालघर थाली का ऐतिहासिक अनावरण।
यह पहल केवल भोजन परोसने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुराने पारंपरिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने का एक गंभीर प्रयास है।
वैश्विक सितारों का मिला साथ
इस गरिमामयी कार्यक्रम में गोवर्धन इकोविलेज के संस्थापक HH राधानाथ स्वामी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को वैश्विक पहचान तब मिली जब प्रसिद्ध लेखक, वक्ता और पर्पस कोच जय शेट्टी अपनी पत्नी राधी देवलोकिया शेट्टी (प्लांट-बेस्ड पाक विशेषज्ञ) के साथ इस अभियान के समर्थक के रूप में शामिल हुए।
जय शेट्टी, जो माइंडफुलनेस और सचेत जीवन शैली के लिए दुनिया भर में अरबों लोगों के प्रेरणास्रोत हैं, ने राधी शेट्टी के साथ मिलकर इस पहल को अपना परोपकारी समर्थन दिया है। इस्कॉन GEV के निदेशक और इस पहल के रणनीतिक प्रमुख, गौराव दास ने कहा:
जय और राधी शेट्टी का समर्थन इस बात को रेखांकित करता है कि भारत की मूल भोजन विरासत से फिर से जुड़ना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

पालघर की सांस्कृतिक और पोषण विरासत का नया अध्याय: इस्कॉन GEV द्वारा ‘पालघर थाली’ का शुभारंभ
क्या है पालघर थाली?
पालघर थाली को तैयार करना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। इसे विकसित करने के लिए स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक पाक कला और मौसमी भोजन चक्रों पर लगभग एक साल का गहन शोध किया गया है।
- उद्देश्य: स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और लुप्त हो रहे स्वदेशी व्यंजनों को पहचान दिलाना।
- अनुभव: जय और राधी शेट्टी उन पहले मेहमानों में शामिल थे जिन्होंने इस थाली का रसास्वादन किया, जो पौष्टिकता और स्वाद का एक अनूठा संगम है।
‘मेरी माटी मेरी थाली’ और भविष्य का रोडमैप
यह आंदोलन केवल पालघर तक सीमित नहीं रहेगा। ‘नेटिव फ़ूड मैटर्स’ अभियान का लक्ष्य पूरे भारत की क्षेत्रीय खाद्य विविधता का जश्न मनाना है। इसके मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:
- ज्ञान भागीदारी: IIM अहमदाबाद (प्रो. रंजन कुमार घोष) और सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स (प्रो. अतुल गोखले) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान इस पहल में नीतिगत और शैक्षणिक सहयोग दे रहे हैं।
- सामुदायिक सशक्तिकरण: अभियान के तहत आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों के लिए ‘पोषण उत्सव’ और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
- दस्तावेजीकरण: कार्यक्रम में एक ‘पालघर कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया गया, जो जिले की पाक विरासत और दुर्लभ सामग्रियों को सहेजने का काम करेगी।
क्यों जरूरी है यह पहल?
आज जब दुनिया भर में 733 मिलियन लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं और कृषि क्षेत्र वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 26% का योगदान दे रहा है, तब गोवर्धन इकोविलेज का यह मॉडल एक समाधान की तरह दिखता है। सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और दुर्लभ बीज बैंक से लैस GEV यह सिद्ध कर रहा है कि स्वदेशी भोजन ज्ञान ही स्थायी और स्वस्थ भविष्य का मार्ग है।
गौराव दास के शब्दों में, “भोजन सिर्फ पोषण नहीं है, यह हमारी पहचान, पारिस्थितिकी और चेतना का प्रतिनिधित्व करता है।”
पाठकों के लिए सूचना: यदि आप भी इस पारंपरिक स्वाद का अनुभव करना चाहते हैं, तो पालघर स्थित गोवर्धन इकोविलेज के ‘गोविंदा रेस्टोरेंट’ में हर सप्ताहांत मदन मोहन थाली के माध्यम से इन क्षेत्रीय व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।































