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नीतीश युग का नया अध्याय: राजनीति के मैदान में उतरे बेटे निशांत कुमार, जदयू की ली सदस्यता; विधान परिषद जाने की तैयारी

नीतीश युग
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नीतीश युग का नया अध्याय: बिहार की राजनीति में रविवार का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार (50) ने औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। लंबे समय तक राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत के इस कदम ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।


पार्टी मुख्यालय में भव्य स्वागत
निशांत कुमार को पटना स्थित जदयू के प्रदेश मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान पार्टी में शामिल कराया गया। इस मौके पर पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि संगठन में निशांत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होने वाली है।

  • मौजूदगी: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत का स्वागत किया।
  • निशांत का बयान: सदस्यता लेने के बाद निशांत ने कहा, “मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का फैसला किया, जो उनका व्यक्तिगत निर्णय था। हम उनके मार्गदर्शन में संगठन को मजबूत करने के लिए निरंतर काम करेंगे।”

अगला पड़ाव: विधान परिषद (MLC)
निशांत के राजनीति में आते ही उनके भविष्य के पद को लेकर भी अटकलें समाप्त हो गई हैं। हरनौत से जदयू विधायक हरि नारायण सिंह ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि निशांत अप्रैल में राज्य विधान परिषद (MLC) के लिए निर्वाचित होंगे।

सियासी मायने: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और अब निशांत के सक्रिय राजनीति में आने को पार्टी के अंदर “उत्तराधिकार” की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, निशांत ने जोर देकर कहा है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है।

कौन हैं निशांत कुमार?
नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार पेशे से इंजीनियर (BIT मेसरा से स्नातक) रहे हैं। अब तक वे अपनी सादगी और आध्यात्मिक झुकाव के लिए जाने जाते थे। 50 वर्ष की आयु में उनका राजनीति में प्रवेश जदयू के लिए एक ‘युवा और अनुभवी’ चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है, जो पार्टी के पुराने कैडर और नई पीढ़ी के बीच सेतु का काम कर सकते हैं।

जदयू की नई रणनीति
नीतीश कुमार के करीबी नेताओं का मानना है कि निशांत के आने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आएगा। विशेषकर ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति में ‘विरासत’ और ‘युवा नेतृत्व’ की बहस छिड़ी हुई है, निशांत की एंट्री विपक्ष के हमलों को कुंद करने का एक जरिया बन सकती है।

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