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स्कूलों में सुरक्षा का ‘कवच’: महाराष्ट्र सरकार का कड़ा फैसला, चरित्र सत्यापन अनिवार्य और ‘पिंक कमरों’ की सौगात

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बदलापुर की हृदयविदारक घटना और उसके बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से सामने आए महिला अत्याचार के मामलों ने महाराष्ट्र सरकार को सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। गुरुवार को विधान परिषद में स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने प्रदेश के स्कूलों के लिए नई और अनिवार्य गाइडलाइंस की घोषणा की। अब राज्य के स्वयं वित्तपोषित (Self-Financed) स्कूलों को भी अपने हर एक कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन कराना ही होगा।

1. ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: पुलिस सत्यापन अब वैकल्पिक नहीं

विधान परिषद में भाजपा विधायक प्रसाद लाड और शिवसेना (शिंदे) विधायक मनीषा कायंदे द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किसे कराना होगा सत्यापन? चपरासी, शौचालय सफाई कर्मी, बस ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड और स्कूल परिसर में काम करने वाले सभी आउटसोर्स कर्मचारी।

सख्त कार्रवाई: भुसे ने चेतावनी दी कि जिन स्कूलों ने अपने स्टाफ का पुलिस चरित्र सत्यापन (Character Verification) नहीं कराया है, उनकी मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

बदलापुर की सीख: शिक्षा मंत्री ने दुख जताते हुए कहा कि बदलापुर घटना के आरोपी के एनकाउंटर के बावजूद वहां दो और घटनाएं हुईं, जो समाज की ‘क्रूर मानसिकता’ को दर्शाती हैं। इसे केवल कानून से नहीं, बल्कि जनजागरूकता से ही बदला जा सकता है।

2. ‘पिंक कमरे’ और छात्राओं की सुरक्षा के नए आयाम

सरकार ने केवल दंड पर ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और सशक्तिकरण के बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान केंद्रित किया है। सदन में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं:

पिंक कमरे (Pink Rooms): राज्य के स्कूलों में छात्राओं के लिए विशेष ‘पिंक कमरे’ बनाए जाएंगे। ये कमरे छात्राओं को स्कूल में एक सुरक्षित और निजी स्थान (Private Space) प्रदान करेंगे।

सेल्फ डिफेंस: स्कूल की छात्राओं को अनिवार्य रूप से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे किसी भी विषम परिस्थिति का सामना कर सकें।

निगरानी तंत्र: हर स्कूल में सखी सावित्री समिति का गठन, शिकायत पेटी की अनिवार्यता और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को और सख्त किया जाएगा।

3. प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए नया कानून

3 से 6 साल की उम्र के बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार गंभीर है।

नया अधिनियम: शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में प्री-प्राइमरी (पूर्व प्राथमिक) स्कूलों को विनियमित करने के लिए एक नया अधिनियम (Act) बनाया जा रहा है।

प्रारूप तैयार: इस कानून का मसौदा (Draft) तैयार किया जा रहा है, जिसके बाद छोटे बच्चों के स्कूलों (प्ले-ग्रुप, नर्सरी) पर भी सरकारी नियमों का कड़ा नियंत्रण होगा।

समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी

शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे का यह बयान न केवल एक सरकारी आदेश है, बल्कि शिक्षण संस्थानों के लिए एक कड़ा संदेश भी है। स्कूलों को ‘विद्या का मंदिर’ बने रहने के लिए वहां काम करने वाले हर व्यक्ति का चरित्र बेदाग होना आवश्यक है। हालांकि, मंत्री ने सही कहा कि केवल कानून काफी नहीं हैं; समाज को अपनी सोच बदलकर बेटियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में काम करना होगा।

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