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AI Impact Summit 2026: पीएम मोदी ने AI के लिए पेश किया MANAV विजन, जानें क्या है इसका मतलब

पीएम मोदी
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राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन सत्र में पीएम मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए “MANAV” विजन पेश किया। उन्होंने इसे टेक्नोलॉजी के विकास के लिए एक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण बताया, जो एथिकल, अकाउंटेबल और इनक्लूसिव ढांचे पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए, न कि मनुष्य को केवल डेटा प्वाइंट में बदल देना।

प्रधानमंत्री के अनुसार, तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में एआई केवल तकनीकी क्रांति नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम है। ऐसे में इसका विकास जिम्मेदारी, पारदर्शिता और समान भागीदारी के सिद्धांतों पर होना आवश्यक है। इसी सोच को संस्थागत रूप देने के लिए MANAV विजन प्रस्तुत किया गया।

क्या है MANAV विजन?

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि MANAV विजन रिस्पॉन्सिबल एआई के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क है। इसमें एआई के विकास और उपयोग के लिए पांच प्रमुख सिद्धांत शामिल हैं।

पहला सिद्धांत है “M – Moral and Ethical Systems”, यानी एआई का संचालन नैतिक दिशा-निर्देशों और मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा के साथ हो।

दूसरा है “A – Accountable Governance”, जिसका अर्थ है एआई सिस्टम के संचालन और निर्णयों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना। इससे पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।

तीसरा तत्व है “N – National Sovereignty”, जिसके तहत डेटा पर अधिकार उसी देश या व्यक्ति का होना चाहिए जिससे वो संबंधित है। डेटा संप्रभुता को डिजिटल युग की मूल शर्त बताया गया।

चौथा है “A – Accessible and Inclusive”, यानी एआई का विकास कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित न रहे। इसे बहु-हितधारक और सभी के लिए सुलभ बनाया जाए, ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

पांचवां और अंतिम सिद्धांत है “V – Valid and Legitimate”, जिसके अंतर्गत एआई आधारित प्रणालियों की वैधता, विश्वसनीयता और कानूनी स्वीकृति सुनिश्चित करना शामिल है।

भारत की एआई पर दृष्टि

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एआई को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के दृष्टिकोण से देखता है। इसका अर्थ है कि तकनीक का उपयोग व्यापक जनकल्याण के लिए हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई के विकास में इंसान केवल कच्चा डेटा न बन जाए, बल्कि तकनीक मानव क्षमता को सशक्त बनाए।

प्रधानमंत्री ने एआई के लोकतंत्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि एआई को ग्लोबल साउथ सहित विकासशील देशों के लिए अवसर का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एआई को खुला और नवाचार के लिए स्वतंत्र वातावरण दिया जाए, लेकिन उसके संचालन पर आवश्यक नियंत्रण और नीति ढांचा भी मौजूद रहे।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में MANAV विजन

एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया भर के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ऐसे मंच पर MANAV विजन का प्रस्तुतीकरण भारत की डिजिटल नीति और वैश्विक नेतृत्व की दिशा को दर्शाता है। यह पहल संकेत देती है कि भारत एआई के क्षेत्र में केवल तकनीकी प्रगति ही नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता देना चाहता है।

MANAV विजन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को मानव मूल्यों के साथ जोड़ने की एक पहल है। इसका उद्देश्य एआई को जिम्मेदार, पारदर्शी और समावेशी बनाना है। डिजिटल युग में जब एआई तेजी से निर्णय लेने और शासन प्रणालियों का हिस्सा बन रहा है, तब इस तरह का मानव-केंद्रित दृष्टिकोण भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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