Air India Crash: पिछले वर्ष 12 जून को अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि मुआवजे को लेकर एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है। लंदन के प्रतिष्ठित अखबार ‘द इंडिपेंडेंट’ की एक हालिया रिपोर्ट ने एयरलाइन के मुआवजे के प्रस्ताव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया ने पीड़ितों के परिवारों के सामने एक ऐसी शर्त रखी है, जिसे कई कानूनी विशेषज्ञ ‘अनुचित’ मान रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
हादसे के महीनों बाद, एअर इंडिया ने पीड़ित परिवारों को अतिरिक्त मुआवजे की पेशकश की है। लेकिन इस वित्तीय सहायता के साथ एक कड़ा कानूनी अनुबंध (Agreement) जुड़ा हुआ है। एयरलाइन की योजना कुछ इस प्रकार है:
- मुआवजे की राशि: परिवारों को अंतिम समझौते के रूप में 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि देने की पेशकश की जा रही है। कुछ विशेष मामलों में यह राशि 20 लाख रुपये तक भी हो सकती है।
- शर्त (The Condition): इस राशि को स्वीकार करने के बदले में, परिवारों को एक कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने होंगे। इसके तहत वे भविष्य में एअर इंडिया के खिलाफ किसी भी देश या किसी भी अदालत में केस दर्ज करने का अपना अधिकार छोड़ देंगे।
- कानूनी मुक्ति: यह समझौता कंपनी को भविष्य की सभी कानूनी जिम्मेदारियों और देनदारियों से पूरी तरह ‘मुक्त’ कर देगा।
कानूनी विशेषज्ञों और परिवारों का विरोध
130 पीड़ितों के परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही लीगल टीम ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- अधूरी जांच: कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि हादसे के लिए तकनीकी खराबी जिम्मेदार थी या मानवीय चूक, तब तक परिवारों को समझौते के लिए मजबूर करना गलत है।
- जिम्मेदारी का अभाव: जिम्मेदारी (Liability) तय हुए बिना एयरलाइन खुद को कानूनी पचड़ों से बचाने की कोशिश कर रही है।
- जारी इलाज: कई यात्री अभी भी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। उनके लिए भविष्य का खर्च और शारीरिक अक्षमता का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।जब तक जांच पूरी नहीं होती और असली गलती सामने नहीं आती, तब तक परिवारों से केस करने का अधिकार छीनना पूरी तरह अनुचित है।
एअर इंडिया का पक्ष
इस पूरे विवाद पर एअर इंडिया के प्रवक्ता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता का कहना है कि एयरलाइन इस बेहद कठिन और संवेदनशील प्रक्रिया से गुजर रहे प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति रखती है। कंपनी का उद्देश्य कानूनी प्रक्रियाओं को लंबा खींचने के बजाय परिवारों को जल्द से जल्द वित्तीय सहायता पहुँचाना है, ताकि वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।
भविष्य की चुनौतियाँ
यह मामला अब एक बड़े कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। यदि परिवार इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो मुआवजे की लड़ाई अदालतों में सालों तक खिंच सकती है। वहीं दूसरी ओर, ‘राइट टू सू’ (केस करने का अधिकार) को छोड़ना परिवारों को भविष्य में मिलने वाले बड़े न्याय से वंचित कर सकता है।






























