महाराष्ट्र की राजनीति और विमानन जगत को झकझोर देने वाले विमान हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित कुल 5 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों में दो अत्यंत अनुभवी और होनहार पायलट – कैप्टन सुमित कपूर और कैप्टन शांभवी पाठक भी शामिल बताए गए हैं। ये हादसा बुधवार सुबह बारामती हवाई अड्डे के पास हुआ, जब एक चार्टर्ड ‘Learjet 45’ विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस घटना ने न केवल राजनीतिक हलकों में बल्कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कौन थे?
इस विमान हादसे में जिन दो पायलटों की जान जाने की बात कही गई है, वे दोनों अपने-अपने क्षेत्र में अत्यंत अनुभवी और पेशेवर माने जाते थे।
कैप्टन सुमित कपूर: 16,500 घंटे का उड़ान अनुभव
विमान के पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमित कपूर दिल्ली के रहने वाले बताए गए हैं। उन्हें भारतीय विमानन उद्योग का एक जाना-पहचाना नाम माना जाता था।
अनुभव और करियर
कैप्टन कपूर के पास 16,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव था। उन्होंने अपने करियर के दौरान सहारा एयरलाइंस, जेटलाइन और जेट एयरवेज जैसी प्रतिष्ठित एयरलाइनों में सेवाएं दी थीं। चार्टर्ड और बिजनेस जेट उड़ानों में उन्हें विशेष महारत हासिल थी।
पेशेवर छवि
काल्पनिक रिपोर्ट के अनुसार, VSR वेंचर्स से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें एक बेहद अनुशासित, शांत और तकनीकी रूप से दक्ष पायलट बताया। वे मुश्किल परिस्थितियों में भी मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए जाने जाते थे।
कैप्टन शांभवी पाठक: सेना परिवार से विमानन तक का सफर
इस हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट (फर्स्ट ऑफिसर) कैप्टन शांभवी पाठक भी दिल्ली की रहने वाली बताई गई हैं। उनका परिवार रक्षा पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ था।
शिक्षा और प्रशिक्षण
शांभवी पाठक एक सेना अधिकारी की बेटी थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से एयरोनॉटिक्स, एविएशन और एयरोस्पेस साइंस में बीएससी की डिग्री हासिल की।
पायलट बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने न्यूजीलैंड इंटरनेशनल कमर्शियल पायलट एकेडमी से प्रशिक्षण लिया था। उनके पास DGCA द्वारा जारी ‘फ्रोजन एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (ATPL)’ भी था।
युवा लेकिन बेहद सक्षम
काल्पनिक सूत्रों के अनुसार, शांभवी को एक अनुशासित, तेज़ निर्णय लेने वाली और भविष्य की उभरती हुई पायलट के रूप में देखा जाता था।
हादसे के समय क्या हुआ?
VSR वेंचर्स से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि लैंडिंग के दौरान क्षेत्र में दृश्यता बेहद कम थी। पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को ‘लो विजिबिलिटी’ की सूचना दी थी।
पहले प्रयास में रनवे स्पष्ट न दिखने के कारण पायलटों ने ‘गो-अराउंड’ का फैसला लिया, जो कि विमानन सुरक्षा का एक मानक और सही कदम माना जाता है। हालांकि, दूसरे प्रयास के दौरान विमान संतुलन खो बैठा और रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
अन्य मृतकों की पहचान
इस काल्पनिक हादसे में पायलटों और अजित पवार के अलावा दो अन्य लोगों की मौत की बात भी कही गई है:
विदिप जाधव – मुंबई पुलिस के 2009 बैच के कांस्टेबल, जो अजित पवार के निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) के रूप में तैनात थे।
पिंकी माली – 29 वर्षीय केबिन क्रू सदस्य, मुंबई के वर्ली की निवासी, जिन्हें सहयोगी और मिलनसार स्वभाव के लिए जाना जाता था।
DGCA की जांच शुरू
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस दुर्घटना की विस्तृत जांच शुरू करने की बात कही है। जांच का मुख्य फोकस मौसम की स्थिति, तकनीकी पहलुओं और लैंडिंग प्रक्रिया पर बताया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतने अनुभवी पायलटों की मौजूदगी के बावजूद यदि दुर्घटना होती है, तो उसके पीछे कई जटिल कारण हो सकते हैं, जिनकी गहन जांच आवश्यक होती है।
ये विमान हादसा अनुभव, तकनीक और परिस्थितियों के बीच संतुलन के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही ये दिखाता है कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और सतर्कता का कोई विकल्प नहीं है, चाहे चालक दल कितना भी अनुभवी क्यों न हो।
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