समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में युवा संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने सरकार के ‘अमृतकाल’ के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने मौजूदा दौर को “संकटकाल” करार देते हुए सरकार पर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने का गंभीर आरोप लगाया।
“अमृतकाल” बनाम “संकटकाल”: संतों की सुरक्षा पर सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार के विकास के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज देश में “अमृतकाल” जैसी कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से साधु-संतों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, यह अमृतकाल नहीं है, यह तो सनातनियों का संकटकाल चल रहा है। आज प्रदेश में संत मारे जा रहे हैं, उनकी निरंतर हत्याएं हो रही हैं और उनका अपमान किया जा रहा है। जो सरकार धर्म के नाम पर वोट मांगती है, वही संतों को सुरक्षा देने में विफल रही है।”
डॉ. आंबेडकर जयंती और ‘संविधान चर्चा’ का शंखनाद
अखिलेश यादव ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी अब केवल चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी ने 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती को एक बड़े अभियान के रूप में मनाने का फैसला किया है।
* गांव-गांव अभियान: सपा कार्यकर्ता अब प्रदेश के कोने-कोने में, गांव-गांव जाकर आंबेडकर जयंती मनाएंगे।
* संविधान पर चर्चा: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच ‘संविधान बचाओ’ का संदेश ले जाना है। अखिलेश का आरोप है कि मौजूदा सरकार लोकतंत्र की जगह “एकतंत्र” (तानाशाही) स्थापित करना चाहती है और संविधान की मूल भावना को कमजोर कर रही है।
युवा संगठनों की बैठक: चुनावी तैयारी तेज
शुक्रवार को अखिलेश यादव ने पार्टी के विभिन्न विंग्स—लोहिया वाहिनी, छात्रसभा और मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड—के जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ लंबी बैठक की। इस बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
* युवाओं की लामबंदी: अखिलेश ने युवा नेताओं को निर्देश दिया कि वे बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर युवाओं को एकजुट करें।
* संगठनात्मक मजबूती: बूथ स्तर तक पार्टी के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
* बीजेपी का मुकाबला: उन्होंने पदाधिकारियों से कहा कि भाजपा की ‘प्रोपेगेंडा मशीनरी’ का मुकाबला करने के लिए जमीनी स्तर पर सच्चाई जनता तक पहुंचाएं।
लोकतंत्र बनाम एकतंत्र की लड़ाई
सपा प्रमुख ने दोहराया कि देश के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती लोकतंत्र को बचाने की है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं पर जिस तरह से कब्जा किया जा रहा है, वह भविष्य के लिए खतरनाक है। समाजवादी पार्टी अब अपनी पूरी ताकत के साथ दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों (PDA) के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरेगी।
अखिलेश यादव का यह बयान और ‘आंबेडकर जयंती’ को गांव-गांव ले जाने की योजना साफ दर्शाती है कि समाजवादी पार्टी अब सामाजिक न्याय के मुद्दे को सीधे गांव की चौपालों तक ले जाने की तैयारी में है। ‘संकटकाल’ और ‘संविधान चर्चा’ जैसे शब्द आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का मुख्य विमर्श बनने वाले हैं।































