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LPG किल्लत के बीच सरकार ने केरोसीन बिक्री के नियमों में दी ढील, लेकिन 400 का स्टोव मिल रहा 1700 में

केरोसीन
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देश में बढ़ती एलपीजी गैस की कमी के बीच सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए केरोसीन (मिट्टी के तेल) की बिक्री के नियमों में ढील दी है। इसका उद्देश्य ये है कि लोग खाना पकाने के लिए वैकल्पिक साधन अपना सकें और गैस पर निर्भरता कम हो। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। बाजार में केरोसीन स्टोव की भारी कमी ने इस योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बाजार में स्टोव का संकट

एक समय भारतीय रसोई का अहम हिस्सा रहा केरोसीन स्टोव आज बाजार से लगभग गायब हो चुका है। जैसे-जैसे एलपीजी का उपयोग बढ़ा, वैसे-वैसे स्टोव का उत्पादन और बिक्री घटती चली गई। अब जब फिर से इसकी मांग बढ़ी है, तो बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं है।

दिल्ली जैसे बड़े थोक बाजारों में भी केरोसीन स्टोव के विक्रेता गिनती के रह गए हैं। कई व्यापारियों ने समय के साथ अपना व्यवसाय बदलकर गैस उपकरणों की ओर रुख कर लिया था, जिससे स्टोव का उत्पादन लगभग बंद हो गया।

कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी

मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने के कारण केरोसीन स्टोव की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। जो स्टोव पहले करीब ₹400 में मिल जाता था, वो अब ₹1500 से ₹1700 तक बिक रहा है।

इसी तरह बड़े स्तर पर इस्तेमाल होने वाली केरोसीन-डीजल भट्टियों की कीमत भी कई गुना बढ़ गई है। पहले ₹8-9 हजार में मिलने वाली भट्टी अब ₹25-30 हजार तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों, हलवाइयों, ढाबा संचालकों और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ रहा है।

उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर

स्टोव निर्माण से जुड़ी सप्लाई चेन भी लगभग ठप हो चुकी है। पहले अलग-अलग शहरों से स्टोव के पार्ट्स आते थे और स्थानीय स्तर पर इन्हें तैयार किया जाता था। लेकिन मांग कम होने के कारण यह उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो गया। अब अचानक बढ़ी मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

मजदूर और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

एलपीजी की कमी का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग पर पड़ा है। गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता के चलते कई मजदूर और निम्न आय वर्ग के लोग फिर से केरोसीन स्टोव पर खाना पकाने को मजबूर हो गए हैं।

केरोसीन स्टोव: फायदे और नुकसान

फायदे:

  • गैस की कमी में उपयोगी विकल्प
  • कई जगह सस्ता ईंधन
  • बिजली या गैस न होने पर भी काम करता है
  • आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है

नुकसान:

  • धुआं और प्रदूषण, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है
  • तेज गंध के कारण असुविधा
  • आग या हादसे का जोखिम
  • बार-बार सफाई और रखरखाव की जरूरत

सरकार की पहल और वर्तमान स्थिति

सरकार ने पेट्रोलियम नियमों में ढील देते हुए कई राज्यों में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत केरोसीन की उपलब्धता बढ़ाने का फैसला किया है। इससे लोगों को ईंधन तो मिल रहा है, लेकिन स्टोव की कमी के कारण इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।

आगे की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना चाहती है, तो उसे केरोसीन स्टोव के उत्पादन और सप्लाई को भी बढ़ावा देना होगा। केवल ईंधन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, जब तक उसके उपयोग के साधन आसानी से उपलब्ध न हों।

कुल मिलाकर, एलपीजी संकट के बीच केरोसीन एक विकल्प के रूप में उभरा जरूर है, लेकिन स्टोव की कमी और बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

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