महाराष्ट्र

रत्नागिरी में दाऊद इब्राहिम से जुड़ी पुश्तैनी जमीनों की नीलामी हुई सफल, मुंबई के खरीदार ने खरीदी सभी संपत्तियां

दाऊद इब्राहिम
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महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले से एक अहम खबर सामने आई है, जहां अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ी पुश्तैनी जमीनों की नीलामी आखिरकार सफल हो गई है। लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को 5 मार्च 2026 को पूरा किया गया, जिसमें मुंबई के एक बोलीदाता ने सभी चार संपत्तियां खरीद लीं। ये नीलामी केंद्र सरकार की निगरानी में कराई गई और इसे प्रशासनिक दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

ये जमीनें रत्नागिरी जिले के खेड़ तालुका के मुम्बके गांव में स्थित हैं, जिसे दाऊद इब्राहिम का पैतृक गांव माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से कई संपत्तियां उसकी मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं, जो इस मामले को और संवेदनशील बनाती हैं। लंबे समय से इन संपत्तियों को बेचने की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से नीलामी पूरी नहीं हो पाती थी।

ये पूरी कार्रवाई SAFEMA कानून, यानी तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेरकर्ता अधिनियम के तहत की गई। इस कानून के जरिए सरकार उन व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त करती है, जो अवैध गतिविधियों या तस्करी से जुड़े रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कासकर परिवार से जुड़ी संपत्तियों के निपटान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि अभी तक खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे इस मामले में उत्सुकता बनी हुई है।

नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अगला चरण भुगतान और आधिकारिक मंजूरी का है। नीलामी जीतने वाले बोलीदाता को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी राशि जमा करनी होगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी की अंतिम स्वीकृति मिलने पर संपत्तियों का आधिकारिक हस्तांतरण किया जाएगा। इस दौरान कानूनी जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया को बेहद सावधानी से पूरा किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है जब इन जमीनों को बेचने की कोशिश की गई हो। इससे पहले 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी कई बार नीलामी आयोजित की गई थी, लेकिन हर बार प्रक्रिया अधूरी रह गई। यहां तक कि नवंबर 2025 में रिजर्व प्राइस को लगभग 30 प्रतिशत तक कम करने के बावजूद भी कोई खरीदार सामने नहीं आया था, जिससे यह मामला लगातार लंबित बना हुआ था।

इन संपत्तियों में लोगों की कम रुचि के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। सबसे बड़ा कारण दाऊद इब्राहिम से जुड़ा सामाजिक और मानसिक प्रभाव माना जाता है, जिसके चलते लोग ऐसी संपत्तियों को खरीदने से हिचकिचाते रहे। इसके अलावा, जमीनों का ग्रामीण क्षेत्र में होना, उनका कृषि उपयोग तक सीमित होना और कानूनी तथा सामाजिक संवेदनशीलता भी प्रमुख वजहें रहीं, जिनके कारण यह नीलामी लंबे समय तक सफल नहीं हो पाई।

इस बार की नीलामी में एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिली। सर्वे नंबर 442 (हिस्सा 13-B) की जमीन, जिसकी रिजर्व कीमत 9.41 लाख रुपये रखी गई थी, वह 10 लाख रुपये से अधिक में बिकी और इस पर दो बोलीदाता शामिल हुए। वहीं बाकी तीन जमीनों, जिनमें सर्वे नंबर 533, 453 और 617 शामिल हैं, पर केवल एक ही बोलीदाता ने हिस्सा लिया और उसने ही सभी संपत्तियां खरीद लीं।

बताया जाता है कि इन संपत्तियों को 1990 के दशक में कासकर परिवार से जब्त किया गया था और बाद में 1993 मुंबई बम धमाके के बाद संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तहत इन्हें केंद्र सरकार के अधीन कर दिया गया। तब से लेकर अब तक इनकी नीलामी के कई प्रयास किए गए, लेकिन कानूनी जटिलताओं और सामाजिक कारणों के चलते यह प्रक्रिया बार-बार बाधित होती रही।

हालांकि इस बार नीलामी सफल रही है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि आगे की राह अभी भी आसान नहीं होगी। भुगतान में देरी, कानूनी अड़चनें और जमीन पर वास्तविक कब्जा लेने जैसी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी विवाद के पूर्ण करना प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, इस नीलामी को एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसने वर्षों से लंबित इस मामले को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है।

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