Bhiwandi: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी से खाद्य सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक्सपायर हो चुके, खराब और दूषित खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय कथित तौर पर दोबारा बाजार में बेचने की आशंका जताई गई है। इस मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जांच के बाद शांतिनगर पुलिस स्टेशन में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में करीब 33.71 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य उत्पादों से जुड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
भिवंडी में कैसे सामने आया पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, 14 और 15 अक्टूबर 2026 को FDA की टीमों ने भिवंडी के अलग-अलग परिसरों और गोदामों में जांच की। इस दौरान अधिकारियों ने ऐसे खाद्य उत्पादों की पड़ताल की, जिन्हें एक्सपायर होने, खराब होने, पैकेजिंग क्षतिग्रस्त होने या अन्य कारणों से बिक्री के लिए अनुपयुक्त माना गया था।
नियमों के अनुसार, ऐसे खाद्य उत्पादों का उचित तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए। हालांकि, जांच में आशंका जताई गई कि कुछ उत्पादों को नष्ट करने के बजाय दोबारा बिक्री के लिए भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने संबंधित स्थानों से स्टॉक की जानकारी जुटाई और आवश्यक कार्रवाई की।
डिस्काउंट स्टोर में मिले एक्सपायर खाद्य उत्पाद
जांच के दौरान गुलजार नगर स्थित एक डिस्काउंट स्टोर में 18 प्रकार के एक्सपायर, खराब और लीक हो रहे खाद्य उत्पाद मिले। इनकी कीमत लगभग 80,575 रुपये बताई गई।
अधिकारियों के मुताबिक, स्टोर संचालक खाद्य लाइसेंस, खरीद के बिल और स्टॉक से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद संबंधित कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की गई और स्टॉक की जांच की गई।
खाद्य उत्पादों को नष्ट करने वाले केंद्र भी जांच के घेरे में
इस मामले में खोनी और कंबा इलाके में स्थित खाद्य उत्पादों के निस्तारण केंद्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, खोनी स्थित बी.के. डिस्पोज परिसर से लगभग 17,382 किलोग्राम खाद्य स्टॉक जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 2.40 करोड़ रुपये बताई गई। वहीं, कंबा स्थित परिसर से लगभग 2,198 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 2.53 लाख रुपये थी।
जांच के दौरान स्टॉक रिकॉर्ड, खाद्य लाइसेंस और उत्पादों को नष्ट किए जाने से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने परिसर में खाद्य उत्पादों को संभालने की क्षमता और आवश्यक अनुमतियों से जुड़े पहलुओं की जांच की।
रिलायंस के गोदाम में भी मिले खराब खाद्य उत्पाद
जांच के दौरान रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के वाडपे स्थित गोदाम का भी उल्लेख सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां लगभग 4,659 किलोग्राम एक्सपायर खाद्य उत्पाद मिले, जिनकी कीमत करीब 3.72 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा लगभग 1,414 किलोग्राम खराब स्टॉक भी मिला, जिसकी कीमत करीब 1.20 लाख रुपये थी।
एफआईआर में रिलायंस रिटेल, जोमैटो हाइपरप्योर और ब्लिंकिट से जुड़े उत्पादों का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारियों ने संबंधित उत्पादों की आपूर्ति, परिवहन और निस्तारण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।
हालांकि, एफआईआर में किसी कंपनी या संस्था का नाम आने का अर्थ ये नहीं है कि उस पर लगे आरोप साबित हो गए हैं। मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
एक्सपायर खाद्य पदार्थों की दोबारा बिक्री से स्वास्थ्य को खतरा
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण का सीधा संबंध लोगों की सेहत से है। एक्सपायर, खराब या दूषित खाद्य उत्पादों का सेवन खाद्य विषाक्तता और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
यदि नष्ट किए जाने वाले खाद्य उत्पादों को दोबारा बाजार में बेचा गया है, तो ये उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में ये पता लगाना जरूरी है कि संबंधित उत्पाद कहां से आए, उन्हें किन माध्यमों से वितरित किया गया और क्या वे उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
10 लोगों के खिलाफ FIR, जांच जारी
इस मामले में 17 अक्टूबर 2026 को भिवंडी के शांतिनगर पुलिस स्टेशन में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि खाद्य उत्पादों के निस्तारण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं कैसे हुईं और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
भिवंडी में सामने आया ये मामला खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन और एक्सपायर खाद्य उत्पादों के उचित निस्तारण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। करीब 33.71 करोड़ रुपये के खाद्य उत्पादों से जुड़े इस मामले में अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि क्या नष्ट किए जाने वाले उत्पादों को दोबारा बाजार में बेचा गया और इस कथित गतिविधि में कौन-कौन शामिल था।
नोट: ये खबर उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।





















