मुंबई: आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों की बिसात बिछ चुकी है और देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस बार भाजपा की रणनीति का मुख्य केंद्र मुंबई में रहने वाला विशाल ‘उत्तर भारतीय’ मतदाता वर्ग है। इस वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए मुंबई भाजपा ने उत्तर प्रदेश और बिहार के दिग्गज नेताओं और सांसदों की एक बड़ी फौज मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।
यूपी-बिहार के 20 बड़े नेताओं की मांग
मुंबई भाजपा ने आलाकमान से उत्तर प्रदेश के 10 और बिहार के 10 प्रभावशाली नेताओं की मांग की है। पार्टी का मानना है कि इन राज्यों के स्थानीय नेता जब मुंबई के प्रवासियों के बीच जाएंगे, तो वे उनसे अधिक आत्मीयता से जुड़ पाएंगे। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के जौनपुर की बदलापुर सीट से भाजपा विधायक रमेश चंद्र मिश्रा मुंबई पहुंच चुके हैं। उन्होंने मंगलवार को कलिना, चांदीवली, कुर्ला और कांदिवली जैसे उत्तर भारतीय बाहुल्य इलाकों की गलियों में घूम-घूमकर भाजपा प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क शुरू कर दिया है।
फिल्मी सितारों और सांसदों का रहेगा जलवा
बीएमसी चुनाव के प्रचार को और अधिक धार देने के लिए भाजपा ने अपने ‘स्टार पावर’ का भी इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
- भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज: गोरखपुर से सांसद रवि किशन, दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी और आजमगढ़ के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ जैसे चेहरे मुंबई की सड़कों पर चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे। इन सितारों की उत्तर भारतीय समाज और युवाओं के बीच जबरदस्त लोकप्रियता है।
- अन्य राज्यों की भागीदारी: केवल यूपी-बिहार ही नहीं, बल्कि तेलंगाना से प्रखर वक्ता माधवी लता और मध्य प्रदेश के भोपाल दक्षिण-पश्चिम से विधायक भगवान दास सबनानी को भी प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्षेत्रवार और जातिगत समीकरणों पर ध्यान
मुंबई भाजपा के सचिव प्रमोद मिश्रा के अनुसार, नेताओं का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है।
- बिहार की टोली: बिहार के पूर्व मंत्री और दरभंगा की जाले सीट से विधायक जीवेश कुमार, पूर्वी चंपारण के सचिंद्र प्रसाद सिंह और अरवल से मनोज शर्मा को बिहार मूल के मतदाताओं वाले वार्डों की जिम्मेदारी दी गई है।
- यूपी की टोली: यूपी से विधायक अवधेश सिंह (पिंडरा, वाराणसी), सुरेंद्र चौरसिया (रामपुर कारखाना, देवरिया), शलभ मणि त्रिपाठी (देवरिया) और रमेश जायसवाल (मुगलसराय) अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मोर्चा संभालेंगे।
भाजपा की इस घेराबंदी का उद्देश्य साफ है—उन वार्डों में जीत सुनिश्चित करना जहाँ उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अपनी जड़ों (यूपी-बिहार) से आए नेताओं को देखकर प्रवासी मतदाताओं के बीच भाजपा अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है। अब देखना यह होगा कि भाजपा का यह ‘बाहरी प्रभाव’ मुंबई की राजनीति के स्थानीय समीकरणों को कितना बदल पाता है।
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