BMC बजट 2026: मुंबई महानगरपालिका अधिनियम के तहत बजट प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया एक वैधानिक बाध्यता है, लेकिन इस वर्ष की परिस्थितियां सामान्य से भिन्न नजर आ रही हैं।
वैधानिक समय-सीमा का संकट
बीएमसी अधिनियम की धारा 126 के अनुसार, प्रशासन के लिए 5 फरवरी तक बजट पेश करना अनिवार्य है। यह समय-सीमा इसलिए रखी गई है ताकि 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले बजट पर चर्चा, संशोधन और उसे अंतिम मंजूरी दी जा सके। पिछले वर्ष भी इस परंपरा का निर्वहन करते हुए 4 फरवरी को बजट पेश किया गया था।
देरी के मुख्य कारण
इस वर्ष बजट में देरी के पीछे दो प्रमुख कारक काम कर रहे हैं:
- राजनीतिक निर्वाचन: फरवरी के पहले सप्ताह में ही महापौर, उप-महापौर और विभिन्न महत्वपूर्ण वैधानिक समितियों (जैसे स्थायी समिति, सुधार समिति) के चुनाव होने की संभावना है।
- प्रशासनिक व्यस्तता: चुनाव प्रक्रिया में बीएमसी के शीर्ष अधिकारियों और अमले की व्यस्तता के कारण बजट की बारीकियों पर ध्यान केंद्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। नई समितियों के गठन के बिना बजट पर चर्चा करना तकनीकी रूप से जटिल होता है।
राज्य सरकार की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, बीएमसी प्रशासन अब शहरी विकास विभाग (UDD) को पत्र लिखकर बजट पेश करने की समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति मांगने की तैयारी में है। चूंकि मुंबई में फिलहाल प्रशासक का कार्यकाल या नई समितियों का गठन एक संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहा है, इसलिए राज्य सरकार से विशेष अनुमति मिलना आवश्यक हो गया है।
संभावित प्रभाव: क्या बदलेगा?
| क्षेत्र | प्रभाव |
|---|---|
| विकास कार्य | बजट में देरी से नए प्रोजेक्ट्स के टेंडर जारी करने में देरी हो सकती है। |
| नीतिगत निर्णय | नई समितियों के गठन के बाद ही बड़े नीतिगत बदलावों को बजट में शामिल किया जा सकेगा। |
| प्रशासनिक व्यय | यदि 31 मार्च तक बजट पारित नहीं होता, तो ‘लेखानुदान’ (Vote on Account) की आवश्यकता पड़ सकती है। |
भविष्य की राह
बीएमसी का आगामी बजट मुंबई की बुनियादी संरचना, विशेष रूप से सड़कों के कंक्रीटीकरण, तटीय सड़क परियोजना (Coastal Road) के अगले चरणों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशासन की कोशिश होगी कि समय-सीमा में भले ही थोड़ी छूट मिले, लेकिन बजट प्रक्रिया फरवरी माह के भीतर ही संपन्न कर ली जाए ताकि विकास कार्यों की रफ्तार न थमे।































