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BMC के खजाने पर ‘सरकारी’ ब्रेक: राज्य सरकार पर 10,931 करोड़ का बकाया, विकास परियोजनाओं की रफ्तार पर टिकी नजरें

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मुंबई: देश की सबसे अमीर नगर पालिका, मुंबई महानगरपालिका (BMC) और राज्य सरकार के बीच वित्तीय लेन-देन का एक बड़ा अंतर सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसे बीएमसी को 10,931 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बकाया चुकाना है। विधान परिषद में उठे एक सवाल के बाद यह साफ हुआ कि शिक्षा से लेकर हाउसिंग तक, कई विभागों का पैसा सरकार के पास अटका हुआ है।

बकाये का गणित: कहाँ फंसा है बीएमसी का पैसा?
सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान शिवसेना (यूबीटी) के विधायक सुनील शिंदे ने जब बीएमसी के बकाये का मुद्दा उठाया, तो कैबिनेट मंत्री उदय सामंत ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बकाये का विवरण कुछ इस प्रकार है:
शिक्षा अनुदान (प्राथमिक व माध्यमिक): ₹7,241 करोड़ 38 लाख (सबसे बड़ा हिस्सा)
गृहनिर्माण विभाग: ₹934 करोड़ 28 लाख
अन्य मद: विभिन्न सरकारी विभागों का संपत्ति कर (Property Tax), सीवेज टैक्स और जल कर (Water Tax) की करोड़ों की राशि भी लंबित है।

मंत्री उदय सामंत ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस राशि को हड़पने वाली नहीं है, बल्कि इसे ‘चरणबद्ध तरीके’ (Phased Manner) से बीएमसी को लौटाया जाएगा।
₹1.41 लाख करोड़ की मेगा परियोजनाओं का जाल

एक तरफ जहाँ बीएमसी को अपने बकाये का इंतजार है, वहीं दूसरी तरफ मुंबई को बदलने वाली विशालकाय परियोजनाओं पर काम जारी है। उदय सामंत ने बताया कि वर्तमान में मुंबई में 1,41,356 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें प्रमुख हैं:
कोस्टल रोड (Coastal Road): मुंबई के पश्चिमी किनारे को जोड़ने वाली यह सड़क यातायात की तस्वीर बदल देगी।
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR): पूर्व और पश्चिम उपनगरों के बीच यात्रा के समय को कम करने वाली यह तीसरी बड़ी लिंक रोड होगी।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP): शहर के गंदे पानी को साफ करने के लिए अत्याधुनिक प्लांट लगाए जा रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
विपक्ष (शिवसेना-यूबीटी) का तर्क है कि यदि सरकार समय पर बकाया राशि का भुगतान नहीं करती है, तो बीएमसी की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर दबाव बढ़ेगा, जिससे भविष्य की नागरिक सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सत्ता पक्ष का कहना है कि विकास की गति रुकी नहीं है और धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।

मुख्य बिंदु:
कुल बकाया: ₹10,931 करोड़।
सबसे ज्यादा लंबित: शिक्षा विभाग का अनुदान।
विकास कार्य: ₹1.41 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स प्रगति पर।
सरकारी आश्वासन: किस्तों में किया जाएगा भुगतान।

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