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BMC Rs 22 Crore Masterplan: 22 करोड़ का मास्टरप्लान, अब मुंबई की नदियों-नालों में नहीं जमा होगा कचरा!

BMC Rs 22 Crore Masterplan: 22 करोड़ का मास्टरप्लान, अब मुंबई की नदियों-नालों में नहीं जमा होगा कचरा!

BMC Rs 22 Crore Masterplan: हर साल मानसून में मुंबई की सड़कों पर पानी भर जाता है। घर, दुकानें और सड़कें डूब जाती हैं, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है। इस बार बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी ने इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बीएमसी ने नदियों और नालों में तैरते कचरे को रोकने के लिए 22 करोड़ रुपये का मास्टरप्लान बनाया है। इस योजना से मानसून में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम करने की उम्मीद है।

इस मास्टरप्लान के तहत मुंबई की प्रमुख नदियों और नालों में खास कचरा अवरोधक लगाए जाएंगे। ये अवरोधक प्लास्टिक, बोतलें और अन्य कचरे को नदियों और नालों में बहने से रोकेंगे। बीएमसी ने छह प्रमुख जलाशयों को चुना है, जिनमें दहिसर नदी, पोइसर नदी, ओशिवरा नदी, मोगरा नाला, गजदरबांध नाला और एनएल रोड नाला शामिल हैं। इन सभी का पानी अरब सागर में जाता है। इन जगहों पर 570.5 मीटर लंबे कचरा अवरोधक लगाए जाएंगे, जिनकी औसत लागत प्रति मीटर 39,614 रुपये है। हर नदी या नाले पर औसतन 3.6 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

बीएमसी के मुताबिक, हर मानसून में नालों और नदियों में कचरा जमा होने की वजह से पानी की निकासी रुक जाती है। इससे निचले इलाकों में पानी भर जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। हाल ही में अगस्त 2025 में मुंबई में चार दिनों में 940 मिलीमीटर तक बारिश हुई थी। इस दौरान कई इलाकों में जलभराव हुआ, क्योंकि नालों में कचरा जमा था। बीएमसी का कहना है कि ये कचरा अवरोधक पानी के बहाव को सुचारू रखेंगे, जिससे सड़कों पर पानी नहीं भरेगा।

इससे पहले बीएमसी ने कोलाबा जैसे आठ स्थानों पर कचरा अवरोधक लगाए थे, जो काफी कामयाब रहे। इन अवरोधकों ने मानसून में करीब 3 मीट्रिक टन कचरा रोका था। अब बीएमसी ने 2026 के मानसून से पहले पश्चिमी उपनगरों में 17 और कचरा अवरोधक लगाने की योजना बनाई है। इस तरह कुल 23 जगहों पर ये अवरोधक काम करेंगे। ये योजना पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि नदियों और नालों का पानी साफ रहे और समुद्र में कचरा कम पहुंचे।

बीएमसी ने लोगों से भी अपील की है कि वे नदियों और नालों में कचरा न फेंकें। अगर लोग इस योजना में साथ दें, तो मुंबई की पुरानी जलभराव की समस्या से काफी राहत मिल सकती है। यह मास्टरप्लान मुंबईकरों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जिससे मानसून में शहर का हाल बेहतर हो सकता है।

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