मुंबई

BMC में ‘शक्ति प्रदर्शन’: महापौर के बाद अब विपक्ष की कमान भी महिलाओं के हाथ

Ritu Tawde & Kishori Pednekar
Ritu Tawde & Kishori Pednekar

BMC: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के हालिया घटनाक्रम ने राजनीति में महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिख दी है। सोमवार को हुई बीएमसी सभागृह की विशेष बैठक में न केवल महत्वपूर्ण पदों की घोषणा की गई, बल्कि यह भी साफ हो गया कि इस बार देश की सबसे अमीर महानगरपालिका में ‘महिला राज’ का दबदबा रहने वाला है।

प्रमुख नियुक्तियाँ और नया समीकरण
महापौर रितु तावडे ने सोमवार को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सौंपी गई सूचियों के आधार पर आधिकारिक नामों की घोषणा की। इस घोषणा में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही मोर्चों पर अनुभवी चेहरों को जगह दी गई है:

  • सभागृह नेता: भाजपा के गणेश खणकर को सदन का नेता नियुक्त किया गया है।
  • नेता प्रतिपक्ष: शिवसेना (उद्धव गुट) की वरिष्ठ नगरसेविका और पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर को विपक्ष का नेता चुना गया है।
  • स्थायी समिति: शिवसेना (उद्धव) ने अनुभव को प्राथमिकता देते हुए 7 बार की निर्वाचित नगरसेविका श्रद्धा जाधव को स्थायी समिति में जगह दी है।

 

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बीएमसी में बढ़ता महिलाओं का वर्चस्व
इस बार के समीकरणों में सबसे खास बात महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। महापौर के पद पर पहले से ही महिला का कब्जा है, और अब विपक्ष की कमान भी एक महिला (किशोरी पेडणेकर) के हाथों में आ गई है। इतना ही नहीं, चार वैधानिक समितियों के गठन में भी पुरुषों की तुलना में महिला सदस्यों की संख्या अधिक दर्ज की गई है। यह बदलाव शहर के प्रशासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की प्रभावी भूमिका को दर्शाता है।

रणनीतिक बदलाव
आमतौर पर परंपरा रही है कि नेता प्रतिपक्ष ही स्थायी समिति का सदस्य भी होता है, लेकिन इस बार शिवसेना (उद्धव) ने एक अलग रणनीति अपनाई है। उन्होंने श्रद्धा जाधव के विशाल अनुभव का उपयोग स्थायी समिति में करने का निर्णय लिया है, जो विपक्षी खेमे की पैठ को और मजबूत कर सकता है।

मुंबई मनपा का यह नया स्वरूप न केवल समावेशी राजनीति का उदाहरण है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में शहर के विकास और जनहित के मुद्दों पर महिला नेतृत्व की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।

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