Bombay HC Slams BMC: मुंबई के गोरेगांव-मालाड लिंक रोड पर एक व्यस्त चौराहे के बीचों-बीच लगे खुले ट्रांसफॉर्मर और हाई टेंशन बिजली के तारों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने इसे जानलेवा खतरा बताते हुए तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं।
मामला मैराथन मैक्सिमा को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में बताया गया कि गोरेगांव-मालाड लिंक रोड के एक चौराहे पर बीच सड़क पर एक खुला ट्रांसफॉर्मर बॉक्स और हाई टेंशन के तार लगे हुए हैं, जो आम लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेतना की पीठ ने कहा कि यह स्थापना इंसानी जिंदगी के लिए खतरनाक है और BMC तथा MSEDCL के अधिकारी किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने कहा, “हमें आश्चर्य है कि सड़क के बीच में इस तरह की बिजली की स्थापना कैसे की गई? इस पर कोई रखरखाव या सावधानी नहीं बरती गई है।”
पीठ ने यह भी कहा कि BMC, जो गोरेगांव-मालाड लिंक रोड का काम देख रही है, ने इस मामले में आँखें मूंद ली हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर किसी दुर्घटना में किसी की जान जाती है या नुकसान होता है, तो BMC और MSEDCL के अधिकारी हर तरह के मुआवजे और कानूनी परिणामों के लिए जवाबदेह होंगे।
हाईकोर्ट ने MSEDCL और BMC को तुरंत उचित कदम उठाकर इस ट्रांसफॉर्मर को हटाने या स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, याचिकाकर्ता सोसाइटी ने पुलिस स्टेशन द्वारा समाज के गेट के बाहर जब्त की गई गाड़ियों को खड़ा करने की शिकायत भी की थी। सरकारी प्लीडर पूर्णिमा कांथरिया ने बताया कि अब वहां से सभी गाड़ियां हटा दी गई हैं, लेकिन पूरे शहर में इस तरह की समस्या से निपटने के लिए एक नीति बनाने के बारे में जानकारी देने के लिए समय मांगा।
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई के लिए तय की है।
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