Budget 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भारत के शहरी भूगोल को फिर से परिभाषित करने का एक साहसिक प्रयास है। इस बार सरकार ने अपनी नज़रें महानगरों के शोर से हटाकर उन उभरते हुए शहरों पर टिकाई हैं, जिन्हें हम टियर-2 और टियर-3 केंद्र कहते हैं। ‘सिटी इकोनॉमिक रीजंस’ (CER) से लेकर म्यूनिसिपल बॉन्ड तक, यह बजट शहरी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है।
🚨Govt. will allocate ₹5,000 crore per City Economic Region (CER) over five years to strengthen urban infrastructure.
Since most of the projects will be awarded on a challenge-based approach, their allocation will largely depend on a state’s political bargaining power and the… pic.twitter.com/OzLWj9DBLA
— Bihar Infra Tales (@BiharInfraTales) February 1, 2026
सिटी इकोनॉमिक रीजंस (CER): आर्थिक विकास के नए उपग्रह
भारत के बड़े महानगर अब आबादी और संसाधनों के बोझ तले दबे महसूस कर रहे हैं। ऐसे में सरकार ने नागपुर, पुणे, भोपाल, जयपुर और पटना जैसे शहरों को ‘सिटी इकोनॉमिक रीजंस’ के रूप में पहचान दी है।
- भारी निवेश: अगले पांच वर्षों के लिए प्रत्येक रीजन को 5,000 करोड़ रुपये का समर्पित फंड मिलेगा।
- बिजनेस इकोसिस्टम: इसका लक्ष्य केवल शहरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि वहां एक ऐसा व्यावसायिक तंत्र खड़ा करना है जिससे स्थानीय युवाओं को नौकरी के लिए पलायन न करना पड़े।
- समान विकास: यह रणनीति सुनिश्चित करेगी कि देश का जीडीपी योगदान केवल दिल्ली-मुंबई तक सीमित न रहे।
इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड: प्राइवेट निवेश के लिए ‘सेफ्टी नेट’
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सबसे बड़ी बाधा ‘अनिश्चितता’ होती है। निजी निवेशक अक्सर लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने से डरते हैं।
- क्रेडिट सुरक्षा: बजट में घोषित ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’ बैंकों और कर्जदाताओं को आंशिक क्रेडिट गारंटी देगा।
- रुकी हुई परियोजनाओं को जीवनदान: इससे उन प्रोजेक्ट्स में दोबारा जान फूँकी जा सकेगी जो फंड की कमी या जोखिम के चलते आधे-अधूरे पड़े थे। यह फंड निजी क्षेत्र और सरकार के बीच भरोसे की एक नई कड़ी बनेगा।
🔸 सार्वजनिक पूंजीगत व्यय वर्ष 2014–15 में ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹11.2 लाख करोड़ के आवंटन तक पहुँच गया है
🔸 वर्ष 2026–27 में इस गति को बनाए रखने के लिए मैं इसे बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव रखती हूँ
🔸 अवसंरचना विकास और निर्माण चरण के दौरान जोखिमों को… pic.twitter.com/VMwh1JHQPY
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) February 1, 2026
पूंजीगत व्यय (Capex): 12.2 लाख करोड़ का निवेश इंजन
सरकार ने पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- मल्टीप्लायर इफेक्ट: जब सरकार सड़क, रेलवे, और बिजली पर 1 रुपया खर्च करती है, तो वह अर्थव्यवस्था में लगभग 2.5 रुपये की वृद्धि करता है।
- ग्रामीण-शहरी जुड़ाव: इस फंड का एक बड़ा हिस्सा छोटे शहरों की बुनियादी सुविधाओं—जैसे जल आपूर्ति, बिजली और आधुनिक शहरी ट्रांसपोर्ट—पर खर्च होगा, जिससे ‘ईज ऑफ लिविंग’ में सुधार आएगा।
म्यूनिसिपल बॉन्ड: नगर निकायों की वित्तीय आजादी
अब तक नगर निगम फंड के लिए पूरी तरह राज्य या केंद्र सरकारों पर निर्भर रहते थे। लेकिन अब सरकार उन्हें ‘पूंजी बाजार’ की शक्ति से जोड़ रही है।
| पहल | विवरण | प्रोत्साहन |
|---|---|---|
| बॉन्ड इश्यू | 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का म्यूनिसिपल बॉन्ड | 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोनस |
| बाजार क्षमता | आर्थिक सर्वे के अनुसार | 63,000 करोड़ रुपये जुटाने की क्षमता |
म्यूनिसिपल बॉन्ड का गणित
यह एक ऐसा ऋणपत्र (Debt Instrument) है जिसके जरिए नगर निगम सीधे आम जनता या संस्थागत निवेशकों से पैसा उधार लेते हैं। इस पैसे का उपयोग सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्मार्ट लाइटिंग और पार्कों जैसे नागरिक प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है। बदले में, निवेशकों को एक निश्चित ब्याज मिलता है।
एक विकेंद्रीकृत भविष्य की ओर
बजट 2026-27 यह स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अपनी ‘टॉप-डाउन’ विकास की नीति को बदलकर ‘लोकल-अप’ मॉडल अपना रहा है। नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर और छोटे शहरों को आर्थिक केंद्र बनाकर सरकार एक ऐसे भारत की नींव रख रही है, जहाँ विकास दिल्ली या बेंगलुरु तक सीमित नहीं, बल्कि हर प्रदेश के टियर-2 शहरों की गलियों में महसूस होगा।































