काबुल/इस्लामाबाद: भारत के पड़ोसी मुल्कों, अफगान-पाक के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक भयावह मानवीय त्रासदी में तब्दील हो चुका है। 26 फरवरी से शुरू हुए पाकिस्तान के हवाई हमलों ने न केवल सीमाई क्षेत्रों को दहला दिया है, बल्कि भारी संख्या में निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। दोनों देशों के बीच तनातनी इस कदर बढ़ गई है कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है, जिससे दक्षिण एशिया में एक नए बड़े युद्ध की आशंका प्रबल हो गई है।
मौत का तांडव और विस्थापन का दंश
पिछले कुछ हफ्तों में हुई सैन्य कार्रवाई के आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं। पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों में अब तक कम से कम 75 नागरिकों की मौत हो चुकी है। हवाई हमलों का निशाना केवल सैन्य ठिकाने नहीं, बल्कि रिहायशी इलाके भी बने हैं।
ध्वस्त ढांचा: हमलों में सैकड़ों घर, महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल जमींदोज हो गए हैं।
विस्थापन: करीब 1.15 लाख लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने को मजबूर हुए हैं। कड़कड़ाती ठंड और सुविधाओं के अभाव में ये शरणार्थी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
जवाबी हमला और सीमा पर सन्नाटा
अफगान सेना की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें हैं, हालांकि यह पाकिस्तान की तुलना में सीमित रही है। अफगान सीमा की तरफ से दागे गए मोर्टार के गोलों ने पाकिस्तान के सीमावर्ती गांवों में भी नागरिक जीवन को प्रभावित किया है। डूरंड रेखा के दोनों ओर अब केवल बारूद की गंध और दहशत का माहौल है।
व्यापार ठप: भूख और दवाइयों का संकट
इस संघर्ष का सबसे घातक असर व्यापार पर पड़ा है। दोनों देशों ने अपनी सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया है।
आपूर्ति बाधित: अफगानिस्तान, जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सीमा पार व्यापार पर निर्भर है, वहां अब भोजन, ईंधन और दवाइयों की भारी किल्लत हो गई है।
आर्थिक मार: ट्रकों की आवाजाही रुकने से फल, सब्जियां और अन्य खराब होने वाला सामान सड़ रहा है, जिससे व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
अड़ियल रुख: समाधान की कोई राह नहीं
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील के बावजूद, न तो तालिबान प्रशासन और न ही इस्लामाबाद झुकने को तैयार है। दोनों ही देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा का हवाला देकर सैन्य कार्रवाई को जायज ठहरा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापारिक मार्ग तुरंत नहीं खोले गए, तो अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर भुखमरी और स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
संकट का सारांश:
हताहत: 75 नागरिकों की मौत (26 फरवरी से अब तक)।
विस्थापन: 1,15,000 लोग बेघर।
प्रभाव: अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इमारतें तबाह।
आपूर्ति संकट: सीमा बंद होने से खाना और दवाइयां खत्म।
अफगान-पाक सीमा का यह संघर्ष अब केवल दो सेनाओं की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि लाखों नागरिकों के जीवन और अस्तित्व का प्रश्न बन गया है। यदि कूटनीतिक रास्ते जल्द नहीं तलाशे गए, तो यह मानवीय संकट पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल सकता है।





























