मुंबई: देश के बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक और बड़ा प्रहार किया है। इस बार रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और उसके शीर्ष पूर्व अधिकारियों के खिलाफ करोड़ों रुपए के कथित घोटाले को लेकर मुंबई में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। इस कार्रवाई ने कॉरपोरेट जगत और बैंकिंग गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
मुंबई में ‘सर्च ऑपरेशन’: महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त
सीबीआई की विशेष टीमों ने मुंबई में रिलायंस टेलीकॉम के पंजीकृत कार्यालय सहित कई प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के केंद्र में कंपनी के तत्कालीन दिग्गज अधिकारी रहे।
* रडार पर दिग्गज: सीबीआई ने रिलायंस टेलीकॉम के तत्कालीन निदेशक सतीश सेठ और गौतम बी. दोशी के आवासों पर तलाशी ली।
* बरामदगी: छापेमारी के दौरान जांच टीम के हाथ कई महत्वपूर्ण फाइनेंशियल रिकॉर्ड, कर्ज के लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य लगे हैं। सीबीआई ने इन सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है ताकि कर्ज की राशि के ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के बहाव) का पता लगाया जा सके।
क्या है पूरा घोटाला? (114.98 करोड़ का फर्जीवाड़ा)
यह पूरा मामला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक शिकायत पर आधारित है। सीबीआई ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, सतीश सेठ, गौतम बी. दोशी और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
* लोन का गणित: रिलायंस टेलीकॉम ने 11 बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) से कुल 735 करोड़ रुपए का टर्म लोन लिया था। एसबीआई इस कंसोर्टियम का हिस्सा था।
* नियमों का उल्लंघन: आरोप है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए लोन की शर्तों और नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया।
* फंड का डायवर्जन: शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि जिस उद्देश्य (टर्म लोन) के लिए कर्ज लिया गया था, उस राशि का उपयोग वहां न करके अन्य व्यावसायिक गतिविधियों या संपत्तियों में किया गया। इस हेरफेर के कारण एसबीआई को सीधे तौर पर 114.98 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
SBI की शिकायत और ‘विलफुल डिफॉल्ट’ का आरोप
एसबीआई ने अपनी शिकायत में कहा है कि कंपनी ने न केवल बैंक को अंधेरे में रखा, बल्कि जानबूझकर भुगतान में चूक (Willful Default) की। बैंक के ऑडिट में पाया गया कि वित्तीय दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया था ताकि बैंक से फंड हासिल किया जा सके।
सीबीआई सूत्रों का कहना है: “यह केवल कर्ज न चुकाने का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन के साथ की गई एक सोची-समझी धोखाधड़ी है। जब्त किए गए दस्तावेजों से यह साफ हो जाएगा कि बैंक से लिया गया पैसा किन-किन फर्जी खातों या शेल कंपनियों में भेजा गया।”
आगे की कार्रवाई: मुश्किल में दिग्गज अधिकारी
सतीश सेठ और गौतम दोशी रिलायंस एडीएजी समूह के काफी भरोसेमंद और वरिष्ठ अधिकारी माने जाते रहे हैं। सीबीआई अब इन अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। यदि जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोक सेवकों (बैंक अधिकारियों) की संलिप्तता के ठोस सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां भी संभव हैं।






























