महाराष्ट्र में कथित ज्योतिषी अशोक खरात मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया द्वारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राकांपा (अजित गुट) की नेता रूपाली चाकणकर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक करने के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। प्राइवेसी और सुरक्षा के इस गंभीर उल्लंघन पर अब शिंदे गुट ने आक्रामक रुख अपनाते हुए जांच की मांग की है।
1. अंजलि दमानिया का दावा और राजनीतिक घमासान
अंजलि दमानिया ने कथित तौर पर यह संकेत दिए हैं कि अशोक खरात मामले के तार सत्ता के उच्च पदों पर बैठे लोगों से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने सीडीआर के हवाले से कुछ संपर्क विवरण साझा किए, जिसने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
2. उदय सामंत का कड़ा प्रहार: “स्रोत का खुलासा हो”
राज्य के उद्योग मंत्री और शिवसेना (शिंदे) के कद्दावर नेता उदय सामंत ने इस मामले में दमानिया की मंशा और उनके पास मौजूद ‘डेटा’ के स्रोत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
* गोपनीयता का उल्लंघन: सामंत ने पूछा कि जो सीडीआर केवल पुलिस या जांच एजेंसियों के पास उपलब्ध होने चाहिए, वे एक सामाजिक कार्यकर्ता के हाथ कैसे लगे?
* SIT जांच की मांग: उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष जांच दल (SIT) को इस बात की गहराई से जांच करनी चाहिए कि यह डेटा लीक कहाँ से हुआ।
* पूरी जानकारी आए सामने: सामंत ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि जानकारी सामने लानी ही है, तो आधी-अधूरे तथ्यों के बजाय पूरी सीडीआर सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
3. एकनाथ शिंदे: “राजनीति के कच्चे खिलाड़ी नहीं”
उदय सामंत ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बचाव करते हुए कहा कि शिंदे राजनीति के कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के रूप में शिंदे कई लोगों से संवाद करते हैं, लेकिन उसे किसी आपराधिक मामले या ज्योतिषी विवाद से जोड़ना केवल उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। उन्होंने संकेत दिया कि यह विरोधियों द्वारा प्रायोजित एक सोची-समझती साजिश हो सकती है।
4. फडणवीस के जांच के संकेत और कानूनी पेंच
गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के संकेत दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी व्यक्ति के सीडीआर को बिना आधिकारिक अनुमति के प्राप्त करना या उसे सार्वजनिक करना ‘इंडियन टेलीग्राफ एक्ट’ और ‘आईटी एक्ट’ के तहत दंडनीय अपराध है। यदि दमानिया के पास यह डेटा अवैध तरीके से पहुँचा है, तो उन पर भी कानूनी गाज गिर सकती है।
प्राइवेसी बनाम पारदर्शिता
यह मामला अब केवल अशोक खरात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ‘डेटा प्राइवेसी’ और ‘पॉलिटिकल सर्विलांस’ की एक बड़ी बहस बन गया है। जहाँ एक ओर अंजलि दमानिया पारदर्शिता और न्याय की बात कर रही हैं, वहीं सरकार इसे सुरक्षा में सेंध मान रही है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच यह तय करेगी कि क्या वास्तव में सत्ता का दुरुपयोग हुआ है या फिर डेटा लीक के जरिए सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई है।
सवाल यह नहीं कि सीडीआर में क्या है, सवाल यह है कि संवेदनशील सरकारी डेटा बाज़ार में किसके इशारे पर घूम रहा है?”
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