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मध्य रेल: प्रगति के पथ पर ‘शताब्दी शिखर’ का ऐतिहासिक वर्ष 2025

मध्य रेल
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~हरीश तिवारी

भारतीय रेल के इतिहास में कुछ वर्ष अपनी उपलब्धियों के कारण स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो जाते हैं। मध्य रेल (Central Railway) के लिए वर्ष 2025 ठीक वैसा ही एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह वर्ष न केवल रिकॉर्ड राजस्व और अवसंरचना विस्तार का साक्षी रहा, बल्कि इसने भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और ‘विरासत के साथ विकास’ के संकल्प को नई ऊँचाई दी है।

100 वर्ष का गौरव: बिजली से दौड़ती रेल की यात्रा
वर्ष 2025 मध्य रेल के लिए भावनात्मक रूप से भी विशेष रहा। रेल परिवार ने विद्युतीकरण के 100 गौरवशाली वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया। 1925 में तत्कालीन विक्टोरिया टर्मिनस (CSMT) से कूर्ला के बीच देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चली थी। आज एक शताब्दी बाद, मध्य रेल हरित ऊर्जा और पूर्ण विद्युतीकरण के साथ राष्ट्र सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

यात्री सेवा और परिचालन: सफलता के नए आंकड़े
मध्य रेल ने इस वर्ष अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाते हुए ₹16,110 करोड़ से अधिक का कुल राजस्व अर्जित किया। नेटवर्क पर 1,500 मिलियन से अधिक यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचाया गया, जबकि माल ढुलाई के क्षेत्र में 73.37 मिलियन टन की लोडिंग दर्ज की गई।

  • डिजिटल टिकटिंग: CSMT पर शुरू किए गए ‘मोबाइल यूटीएस सहायक’ ने यात्रियों को कतारों से मुक्ति दिलाई।
  • अनुशासन: बिना टिकट यात्रा के विरुद्ध अभियान में ₹216.62 करोड़ का जुर्माना वसूला गया, जो रेल राजस्व की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

कनेक्टिविटी और नई सेवाएँ: बदलता परिदृश्य
उपनगरीय नेटवर्क का विस्तार करते हुए तरघर और गावण जैसे नए स्टेशनों को चालू किया गया, जो सीधे तौर पर नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी को मजबूत करते हैं।
इस वर्ष की कुछ प्रमुख ट्रेन सेवाएँ जो शुरू की गईं:

  •  वंदे भारत एक्सप्रेस: पुणे-अजनी और नांदेड़-CSMT।
  • अमृत भारत एक्सप्रेस: लोकमान्य तिलक टर्मिनस-सहरसा।
  • कुंभ मेला विशेष: महाकुंभ 2025 के लिए मुंबई से 823 ट्रेन सेवाओं का संचालन एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही।

अवसंरचना और गति का संगम
मध्य रेल ने दुर्गम भौगोलिक चुनौतियों को पार करते हुए पुणे-मिरज डबलिंग परियोजना (281 किमी) को पूर्ण किया। इसके साथ ही:

  • गति सीमा में वृद्धि: दौंड-सोलापुर-वाडी खंड पर ट्रेनों की रफ्तार 110 से बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटा की गई।
  • वंचित क्षेत्रों को जोड़ना: अमलनेर-बीड नई रेल लाइन ने दशकों पुराने सपने को साकार किया।
  • भविष्य की तैयारी: नासिक में 2027 के सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹1500 करोड़ के कार्यों का शिलान्यास किया गया।

सुरक्षा में ‘कवच’ और नवाचार का प्रहार
तकनीकी मोर्चे पर, मध्य रेल देश का पहला क्षेत्रीय रेल बना जिसने महज छह माह में सभी पांचों मंडलों में ‘कवच’ (KAVACH) लोको ट्रायल पूरे किए। मानसून की चुनौतियों और डिब्बों में जलस्तर की निगरानी के लिए विकसित किए गए इन-हाउस सॉफ़्टवेयर समाधानों ने रेल सुरक्षा को ‘हाई-टेक’ बना दिया है।

हरित ऊर्जा और मानवीय संवेदनाएँ
‘नेट-ज़ीरो’ लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए मध्य रेल ने ‘ओपन एक्सेस पावर प्रोक्योरमेंट’ के जरिए हरित ऊर्जा को अपनाया। वहीं, मानवीय सेवा में आरपीएफ का ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ किसी वरदान से कम नहीं रहा, जिसके तहत 1,499 बच्चों को बचाया गया।

पनवेल-करजत उपनगरीय कॉरिडोर और 15-कोच ट्रेनों जैसी आगामी योजनाओं के साथ मध्य रेल 2026 में प्रवेश कर रहा है। डॉ. स्वप्निल नीला (मुख्य जनसंपर्क अधिकारी) के कुशल मार्गदर्शन में जारी यह प्रगति दर्शाती है कि मध्य रेल केवल पटरियों पर दौड़ती ट्रेन नहीं, बल्कि विकसित भारत की बदलती हुई धड़कन है।

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