Chandra Grahan 2026: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, संवत 2082 के अवसर पर 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को दुर्लभ खग्रास चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। इस बार होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और धुलेंडी (होली) का पर्व लगातार तीन दिनों में पड़ रहा है, जिससे ये समय धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व का माना जा रहा है।
2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी। आइए जानते हैं ग्रहण का समय, सूतक काल, भारत में कहां दिखेगा ग्रहण, राशियों पर प्रभाव और ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें।
चंद्र ग्रहण 2026 का समय (भारतीय समयानुसार)
पंचांग के अनुसार 3 मार्च 2026 को लगने वाले खग्रास चंद्र ग्रहण का समय इस प्रकार रहेगा:
ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:19 बजे
मध्यकाल: शाम 5:04 बजे
मोक्ष (समापन): शाम 6:47 बजे
हालांकि भारत में ग्रहण का आरंभ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ये चंद्रोदय से पहले ही शुरू हो जाएगा। अधिकांश स्थानों पर चंद्रोदय के बाद केवल ग्रहण का अंतिम चरण (मोक्ष) ही दिखाई देगा।
भारत में इन राज्यों में दिखेगा ग्रहण अधिक स्पष्ट
ज्योतिषीय गणना के अनुसार ये चंद्र ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा।
पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में ग्रहण का दृश्य प्रभाव अधिक स्पष्ट रहने की संभावना है:
अरुणाचल प्रदेश
असम
नागालैंड
मणिपुर
अन्य स्थानों पर आंशिक रूप से ग्रहण का अंतिम चरण देखा जा सकेगा। भारत के अलावा ये ग्रहण यूरोप, एशिया, उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा।
सुबह 6:20 बजे से शुरू होगा सूतक काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पूर्व आरंभ हो जाता है।
3 मार्च 2026 को सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रारंभ माना जाएगा।
सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। भोजन पकाना और शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
भोजन कब बनाएं?
सूतक शुरू होने से पहले ही भोजन बना लें और उसमें तुलसी दल डाल दें। विशेष रूप से बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए ग्रहण स्पर्श से 3 घंटे पहले यानी दोपहर 12:20 बजे से सूतक मानने की सलाह दी गई है।
2 मार्च को होलिका दहन, 4 मार्च को धुलेंडी
पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को होने के कारण परंपरा अनुसार उसी दिन होलिका दहन किया जाएगा।
4 मार्च 2026 (बुधवार) को धुलेंडी (धुरेड़ी) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन लोग रंग-गुलाल लगाकर, मिठाइयां बांटकर और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर होली का उत्सव मनाएंगे। ग्रहण के संयोग के कारण इस वर्ष होली का पर्व धार्मिक दृष्टि से और भी विशेष माना जा रहा है।
12 राशियों पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा:
मेष: चिंता
वृषभ: मानसिक व्यथा
मिथुन: लक्ष्मी कृपा
कर्क: हानि या क्षति
सिंह: कष्ट या घात का योग
कन्या: हानि
तुला: लाभ
वृश्चिक: सुख
धनु: मानहानि की आशंका
मकर: मृत्यु तुल्य कष्ट
कुंभ: स्त्री पीड़ा
मीन: सौख्य और शांति
ग्रहण काल में क्या न करें
भोजन न करें और न पकाएं
शयन (सोना) से बचें
मूर्तियों को स्पर्श न करें
गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी बरतें
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत न करें
ग्रहण काल में क्या करें?
ग्रहण से पूर्व स्नान करें
ग्रहण काल में जप, हवन और मानसिक पूजा करें
श्राद्ध और तर्पण करना शुभ माना गया है
ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान-दान करें
गंगा, यमुना, सरयू या नर्मदा जैसे पवित्र जल में स्नान का विशेष महत्व है
अन्न, वस्त्र, गुड़, तेल, तांबे के पात्र, स्वर्ण-रजत आदि का दान करें
ज्योतिषाचार्य की राय
परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर (मध्य प्रदेश) के आचार्य पंडित सोहन शास्त्री के अनुसार, ग्रहण काल में किए गए मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान जितनी अवधि तक जप किया जाए, उसका फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
चंद्र ग्रहण 2026 का ये संयोग धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और होली का लगातार आना इस पर्व को और भी विशेष बना रहा है। ऐसे में ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए सावधानी और श्रद्धा के साथ इस अवधि को बिताना शुभ फलदायी माना गया है।





























