मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सघन बस्तियों में रहने वाले लाखों नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह स्पष्ट किया है कि ‘बस्ती स्वच्छता कार्यक्रम’ के अंतर्गत अक्टूबर 2026 तक 243 नए सामूहिक शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इससे मुंबईकरों को 4,000 नए शौचकूप (Toilet Seats) उपलब्ध होंगे, जिससे सार्वजनिक स्वच्छता के स्तर में बड़ा सुधार आएगा।
सदन में उठा सवाल: बुनियादी सुविधाओं पर जोर
विधान परिषद में बजट सत्र के दसवें दिन, राकांपा (अजित गुट) के विधायक अमोल मिटकरी और विक्रम काले द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई के स्वच्छता ढांचे का पूरा ब्यौरा पेश किया।
आंकड़ों में मुंबई का ‘स्वच्छता मिशन’
वर्तमान में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में शौचालयों का जाल बिछाया गया है, जिसका विवरण निम्नलिखित है:
म्हाडा (MHADA): 3,830 शौचालय
मुंबई मनपा (BMC): 3,140 शौचालय
पे एंड यूज व अन्य: 1,190 शौचालय
कॉर्पोरेट/सीएसआर (CSR): 28 शौचालय
कुल उपलब्धता: इन सभी माध्यमों से अब तक 1 लाख 800 शौचकूप उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
पुराने ढांचे की जगह लेंगे आधुनिक ‘RCC’ शौचालय
शिंदे ने सदन को बताया कि सरकार अब पुराने और जर्जर शौचालयों को हटाकर उन्हें आरसीसी (RCC) पद्धति से पुनर्गठित कर रही है। यह न केवल टिकाऊ हैं बल्कि अधिक सुरक्षित भी हैं।
निधि का प्रावधान:
साल 2025-26 के लिए मुंबई मनपा ने 594 जगहों पर नए सामूहिक शौचालय बनाने हेतु 100 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। वर्तमान में 243 शौचालयों पर काम शुरू है, जिनमें से 123 का निर्माण पूरा हो चुका है और शेष 120 का काम अक्टूबर 2026 तक पूरा हो जाएगा।
देखभाल के लिए ‘कम्युनिटी’ मॉडल: CBO की नियुक्ति
केवल निर्माण ही काफी नहीं है, उनकी स्वच्छता और देखरेख सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए सरकार ने एक त्रिकोणीय व्यवस्था बनाई है:
बस्ती स्तर पर संस्था (CBO): 4,309 शौचालयों की दैनिक देखभाल के लिए स्थानीय स्तर पर सामुदायिक संगठनों (Community Based Organizations) को बनाने की प्रक्रिया जारी है।
ठेका समाज विकास अधिकारी: मुंबई के 25 विभागों में इन शौचालयों के पर्यवेक्षण (Supervision) के लिए 29 विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
बुनियादी कनेक्शन: 8,188 शौचालयों के डेटा विश्लेषण से पता चला है कि 2,324 में बिजली और 2,247 में नल कनेक्शन सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
नई नियमावली: पर्याप्त संख्या और आधुनिकता
उपमुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि नई स्वच्छता नियमावली के अनुसार, जैसे ही ये 4 हजार नए शौचगृह शुरू होंगे, मुंबई की बस्तियों में शौचालयों की कमी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। यह कदम न केवल ‘ओपन डेफिकेशन फ्री’ (ODF) स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
100 करोड़ का बजट और अक्टूबर 2026 की समयसीमा यह दर्शाती है कि सरकार मुंबई की बस्तियों को केवल ‘वोट बैंक’ नहीं, बल्कि रहने योग्य ‘स्वस्थ क्षेत्र’ बनाने की दिशा में काम कर रही है। आरसीसी निर्माण और सीबीओ (CBO) के माध्यम से रखरखाव का यह मॉडल यदि सफल रहता है, तो यह देश के अन्य महानगरों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।































