भोपाल में कांग्रेस का ‘रणशंख’: मध्य प्रदेश की धरती पर कांग्रेस ने मंगलवार को अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। मौका था भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ आयोजित ‘किसान महाचौपाल’ का, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। राहुल गांधी के भाषण ने उस वक्त सनसनी फैला दी जब उन्होंने इस व्यापारिक समझौते को देश के हितों से ‘सौदा’ करार दिया।
“कैबिनेट को रखा अंधेरे में”: राहुल का सनसनीखेज दावा
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह ट्रेड डील लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करके की गई है। उनके दावों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- मंत्रियों की अनभिज्ञता: राहुल ने दावा किया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और स्वयं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस समझौते की शर्तों की भनक तक नहीं थी।
- संसदीय बाईपास: आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री संसद में चर्चा छोड़कर निकल गए और उसी शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन कर जल्दबाजी में डील फाइनल कर दी।
नरेंद्र मोदी को खुला चैलेंज👇
दम है तो ट्रेड डील रद्द करके दिखाएं pic.twitter.com/PJrT2mHrJ7
— Congress (@INCIndia) February 25, 2026
डील के पीछे ‘डर’ की थ्योरी: एप्सटीन और अदाणी
राहुल गांधी ने इस समझौते की टाइमिंग और जल्दबाजी के पीछे दो बेहद गंभीर और चौंकाने वाले कारण बताए हैं:
- एप्सटीन फाइलों का खौफ: राहुल ने अमेरिका की उन 30 लाख गोपनीय फाइलों का जिक्र किया (जो जेफरी एप्सटीन मामले से जुड़ी हैं), जिनमें दुनिया के कई रसूखदार नाम शामिल होने की बात कही जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि इन फाइलों का डर समझौते का एक कारण हो सकता है।
- गौतम अदाणी पर कानूनी शिकंजा: राहुल के अनुसार, अमेरिका में उद्योगपति गौतम अदाणी पर दर्ज क्रिमिनल केस से बचाने के लिए भारत के राष्ट्रीय हितों और किसानों के भविष्य को दांव पर लगा दिया गया है।
किसान महाचौपाल: विरोध के मुख्य स्वर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों की कमर तोड़ देगा। महाचौपाल में मुख्य चिंताएं ये रहीं:
- विदेशी उत्पादों की एंट्री: अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने से भारतीय किसानों को नुकसान होगा।
- पारदर्शिता का अभाव: समझौते के दस्तावेजों को सार्वजनिक न करना संदेह पैदा करता है।
विवाद के मुख्य बिंदु: एक नजर में
राहुल गांधी के आरोप और संभावित प्रभाव
| पहलू (Aspect) | विवरण (Details) | संभावित प्रभाव (Possible Impact) |
|---|---|---|
| प्रक्रिया (Process) | कैबिनेट और वरिष्ठ मंत्रियों को जानकारी नहीं दी गई | संवैधानिक ढांचे और सामूहिक जिम्मेदारी पर सवाल |
| बाहरी दबाव (External Pressure) | अदाणी केस और एप्सटीन फाइलों का मनोवैज्ञानिक दबाव | भारत की विदेश नीति की संप्रभुता पर चोट |
| समय (Timing) | संसद सत्र के दौरान गुप्त तरीके से सहमति | विपक्ष की आवाज को अनसुना करने का आरोप |
भोपाल का यह प्रदर्शन केवल एक क्षेत्रीय आंदोलन नहीं, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत है। राहुल गांधी द्वारा सीधे तौर पर ‘ब्लैकमेल’ और ‘निजी हितों’ के आरोपों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। अब देखना यह है कि सरकार इन आरोपों पर क्या सफाई देती है और इस ट्रेड डील की शर्तें कितनी पारदर्शी रखी जाती हैं।































