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‘Dhurandhar 2’ की शूटिंग पर गहराया विवा; प्रोडक्शन हाउस पर ब्लैकलिस्टिंग की मांग

Dhurandhar 2
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रणवीर सिंह स्टारर अपकमिंग फिल्म ‘Dhurandhar 2’ रिलीज से पहले विवादों में घिरती नजर आ रही है। मुंबई के बोरा बाजार स्थित मोदी स्ट्रीट में फिल्म की शूटिंग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि रिहायशी और साइलेंट जोन क्षेत्र में देर रात तक फायरिंग, धमाकों जैसे सीन फिल्माए गए और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जबकि अनुमति शर्तों में इन गतिविधियों की इजाजत नहीं थी।

मामले में सामाजिक कार्यकर्ता संजय ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि शूटिंग के दौरान नियमों का खुला उल्लंघन हुआ और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने संबंधित प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग की मांग की है।

रिहायशी और साइलेंट जोन में शूटिंग पर आपत्ति

शिकायतकर्ता के अनुसार, मोदी स्ट्रीट बोरा बाजार रोड एक रिहायशी इलाका है और इसे साइलेंट जोन की श्रेणी में रखा गया है। क्षेत्र में पहले से सड़क खुदाई और ट्रैफिक डायवर्जन चल रहा था। इसके बावजूद कथित तौर पर शूटिंग के लिए पूरा रोड ब्लॉक कर दिया गया।

आरोप है कि शूटिंग के दौरान टेरेस सीन, मशीनगन जैसी आवाजें, फायरिंग इफेक्ट, गैस सिलेंडर और धमाकों का इस्तेमाल किया गया। जबकि अनुमति आवेदन में ये उल्लेख किया गया था कि ड्रोन, क्रेन और केबल का उपयोग नहीं किया जाएगा।

ड्रोन उपयोग पर एफआईआर, लेकिन जब्ती नहीं

संजय के मुताबिक, 1 तारीख को ड्रोन उड़ाया गया, जिसके बाद एक पुलिस कांस्टेबल ने धारा 223 के तहत एफआईआर दर्ज की। हालांकि, उनका दावा है कि अब तक ड्रोन जब्त नहीं किया गया है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि गैस सिलेंडर के उपयोग से संबंधित धाराएं शिकायत में जोड़े जाने की मांग के बावजूद शामिल नहीं की गईं।

उनका कहना है कि एक स्थान की अनुमति लेकर दूसरे स्थान पर शूटिंग की गई, जो नियमों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में प्रोडक्शन हाउस को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए और जमा की गई डिपॉजिट राशि जब्त की जानी चाहिए।

नए नाम से दोबारा अनुमति लेने का आरोप

शिकायतकर्ता का दावा है कि 12 तारीख को दोबारा अनुमति मांगी गई, जिसमें पुलिस ने एनओसी दे दी, लेकिन बीएमसी ने पहले हुए दुरुपयोग के आधार पर आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद 13 तारीख को नया आवेदन दिया गया, जिसमें कंपनी का नाम बदला गया और फिल्म का नाम तक उल्लेखित नहीं था।

आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने फिर एनओसी जारी कर दी और बाद में बीएमसी ने शाम के बाद स्टाम्प पेपर पर अंडरटेकिंग लेकर अनुमति प्रदान कर दी।

देर रात ब्लास्ट सीन और सुरक्षा पर सवाल

संजय का कहना है कि रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच ब्लास्ट जैसा सीन फिल्माया गया, जबकि ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं थी। उन्होंने आपातकालीन नंबर पर कॉल करने की बात भी कही, लेकिन आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। बाद में बीएमसी अधिकारी के हस्तक्षेप से शूटिंग रोकी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौरान संजय दत्त और अर्जुन रामपाल भी शूटिंग लोकेशन पर मौजूद थे और टेरेस पर दृश्य फिल्माए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस विशेष क्षेत्र के लिए अनुमति दी जाती है, शूटिंग उसी तक सीमित रहनी चाहिए, न कि पूरी गली या इलाके में फैलाई जाए।

साइलेंट जोन में आधी रात के बाद शूटिंग पर सवाल

मामले में ये भी प्रश्न उठाया गया है कि साइलेंट जोन घोषित क्षेत्र में आधी रात के बाद शूटिंग की अनुमति कैसे दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, आसपास परीक्षाएं भी चल रही थीं और इलाके में कई पुरानी लकड़ी की इमारतें हैं, जिससे संभावित हादसे का खतरा बढ़ सकता था।

उन्होंने इस मुद्दे को पुलिस आयुक्त के साप्ताहिक जनसुनवाई कार्यक्रम में भी उठाया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कार्रवाई की मांग

संजय ने कहा है कि यदि अनुमति देने में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, चाहे प्रोडक्शन हाउस कितना भी बड़ा क्यों न हो।

इस पूरे मामले में प्रोड्यूसर आदित्य धर से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।

‘धुरंधर: द रिवेंज’ की शूटिंग से जुड़ा ये विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो प्रोडक्शन हाउस को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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