राहुल गांधी: संसद के गलियारों में पिछले कुछ दिनों से जारी गरमागरमी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ सरकार ने ‘विशेषाधिकार हनन’ (Privilege Motion) का प्रस्ताव लाने का विचार फिलहाल छोड़ दिया है। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उनकी मुश्किलें खत्म हो गई हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के एक नए दांव ने इस मामले को फिर से गंभीर बना दिया है।
क्यों टला विशेषाधिकार हनन का मामला?
बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण को लेकर सत्ता पक्ष ने उन पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर लोकसभा सचिवालय और सत्ता पक्ष के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निष्कर्ष निकला:
- तथ्यों का सत्यापन: राहुल गांधी अपने भाषण में दिए गए कुछ दावों को बाद में सदन के पटल पर सत्यापित (Verify) नहीं कर पाए थे।
- सदन का निर्णय: गहन विचार-विमर्श के बाद यह पाया गया कि उनके भाषण से विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं बनता है।
- कार्रवाई: इसके विकल्प के तौर पर, सरकार ने राहुल के भाषण के उन विवादित अंशों को सदन की कार्यवाही (Record) से हटा दिया है, जिन पर सत्ता पक्ष को सबसे ज्यादा आपत्ति थी।
नियम 352(5) और 353: सदस्यता पर नया खतरा
विशेषाधिकार हनन का मामला भले ही शांत हो गया हो, लेकिन भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ‘सब्सटेंटिव मोशन’ (Substantive Motion) के जरिए नई घेराबंदी कर दी है।
क्या है यह खतरा?
निशिकांत दुबे ने लोकसभा के नियम 352(5) और नियम 353 के तहत नोटिस दिया है। यदि यह प्रस्ताव सदन में पास हो जाता है, तो राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जाने तक की नौबत आ सकती है। यह नियम सदन के सदस्यों द्वारा अनुचित आचरण या बिना सबूत के गंभीर आरोप लगाने से संबंधित हैं।
FIR हो,
मुकदमा दर्ज हो या
Privilege प्रस्ताव लाएं – मैं किसानों के लिए लड़ूंगा।जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है।
अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे। pic.twitter.com/gNVMEYFp3i
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 12, 2026
राहुल गांधी का पलटवार: “किसानों के लिए लड़ता रहूंगा”
संसदीय कार्रवाई की तलवार लटकने के बावजूद राहुल गांधी के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार को सीधे चुनौती दी है:
- डर का अभाव: राहुल ने स्पष्ट किया कि चाहे उन पर FIR हो, मुकदमा चले या विशेषाधिकार का प्रस्ताव आए, वे पीछे नहीं हटेंगे।
- मुद्दा: उन्होंने अपनी लड़ाई को किसानों से जोड़ते हुए कहा, “जो ट्रेड डील रोजी-रोटी छीने और देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान विरोधी है।”
आगे क्या होगा?
वर्तमान स्थिति यह है कि सरकार ने सीधा ‘विशेषाधिकार हनन’ का रास्ता तो छोड़ दिया है, लेकिन निशिकांत दुबे का ‘सब्सटेंटिव मोशन’ एक बड़ा संवैधानिक पेंच फंसा सकता है। अब गेंद लोकसभा अध्यक्ष के पाले में है कि वे इस मोशन को स्वीकार करते हैं या नहीं।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
- विशेषाधिकार हनन: मामला नहीं बनता, प्रस्ताव रद्द।
- भाषण: विवादित अंश रिकॉर्ड से हटाए गए।
- नया दांव: नियम 352(5) और 353 के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग।
- राहुल का स्टैंड: किसानों के हक के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प।






























