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Davos 2026: महाराष्ट्र का ‘महा-निवेश’ और भारत के आर्थिक उदय की नई इबारत

Davos 2026
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Davos 2026: स्विट्जरलैंड की बर्फीली वादियों में स्थित दावोस में जब दुनिया भर के दिग्गज आर्थिक भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं, तब भारत के महाराष्ट्र राज्य ने अपनी औद्योगिक शक्ति का ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने वैश्विक सुर्खियां बटोर ली हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह दावा कि “महाराष्ट्र ही भारत के लिए निवेश का असली गेटवे ऑफ इंडिया है”, केवल एक नारा नहीं बल्कि एक ठोस वास्तविकता बनकर उभरा है।

ऐतिहासिक आंकड़ा: ₹14.5 लाख करोड़ का निवेश
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वार्षिक सम्मेलन के पहले ही दिन महाराष्ट्र ने 19 बड़े समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए, जिनका कुल मूल्य ₹14,50,000 करोड़ ($173 बिलियन) से अधिक है। यह आंकड़ा न केवल राज्य के इतिहास में, बल्कि संभवतः किसी भी भारतीय राज्य द्वारा एक ही दिन में हासिल किया गया अब तक का सबसे बड़ा निवेश लक्ष्य है।

रोजगार का महाकुंभ: 15 लाख नए अवसर
इस निवेश की सबसे बड़ी सफलता इसका सामाजिक प्रभाव है। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए 15 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि राज्य के लाखों परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का संकल्प है।

प्रमुख क्षेत्र और भविष्य की तकनीक
इस निवेश पोर्टफोलियो की विविधता भविष्य के ‘विकसित महाराष्ट्र’ की झलक दिखाती है:

  • हरित ऊर्जा और ईवी: टिकाऊ भविष्य के लिए ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भारी निवेश।
  • डाटा सेंटर और आईटी: डिजिटल इंडिया की रीढ़ बनने की दिशा में कदम।
  • बुनियादी ढांचा: इसमें अकेले MMRDA द्वारा करीब ₹11 लाख करोड़ के करार किए गए हैं, जो ‘मुंबई 3.0’ और ‘थर्ड मुंबई’ जैसे आधुनिक शहरों की नींव रखेंगे।
  • स्टील और विनिर्माण: गड़चिरोली जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक क्रांति के लिए भारी उद्योगों पर जोर।

समावेशी विकास: रत्नागिरी से गड़चिरोली तक
सरकार ने सुनिश्चित किया है कि यह निवेश केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। रत्नागिरी, पालघर, गड़चिरोली और अहिल्यानगर जैसे जिलों में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन खत्म होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

निवेशकों का अटूट भरोसा
मुख्यमंत्री फडणवीस और उद्योग मंत्री उदय सामंत की मौजूदगी में हुए ये करार दर्शाते हैं कि ‘मैग्नेटिक महाराष्ट्र’ की चमक वैश्विक बाजार में बरकरार है। ‘MAITRI’ (सिंगल विंडो सिस्टम) जैसी नीतियों ने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया है कि महाराष्ट्र में व्यापार करना आसान और सुरक्षित है।

14.5 लाख करोड़ रुपये का यह निवेश महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर और भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मार्ग में सबसे बड़ा उत्प्रेरक साबित होगा। यह महाराष्ट्र की प्रशासनिक कुशलता और नेतृत्व की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां आज महाराष्ट्र कोअपना दूसरा घर मान रही हैं

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