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दिल्ली में लापता होने का संकट: 15 दिनों में 807 गायब, 509 महिलाएं और 191 बच्चे – 572 अब भी नहीं मिले

दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नए साल की शुरुआत ही चिंता और डर के साथ हुई है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोग लापता हुए हैं। ये आंकड़ा औसतन प्रतिदिन 54 लोगों के गायब होने का संकेत देता है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि इनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां (करीब 63%) शामिल हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 298 है। साथ ही 191 नाबालिग बच्चे भी लापता हुए हैं, यानी औसतन हर दिन 13 बच्चे गायब हो रहे हैं।

ये आंकड़े पीटीआई (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) और अन्य विश्वसनीय स्रोतों द्वारा दिल्ली पुलिस से प्राप्त किए गए हैं। इनमें से महिलाओं और किशोरियों के मामले सबसे अधिक हैं, जो दिल्ली में महिला और बाल सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कुल लापता लोगों में वयस्कों की संख्या 616 है, जिसमें महिलाओं की संख्या 363 और पुरुषों की 253 है। नाबालिगों में लड़कियों के मामले 146 हैं।

पुलिस की स्थिति और ट्रेसिंग का रिकॉर्ड

दिल्ली पुलिस ने अब तक केवल 235 लोगों का पता लगाकर उनके परिवारों से मिलवाया है, जिसमें वयस्कों में 90 पुरुष और 91 महिलाएं शामिल हैं। बाकी 572 लोग अब भी लापता हैं और उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ये संख्या दिल्ली की कानून-व्यवस्था और जांच तंत्र की क्षमता पर बड़ा सवाल उठाती है। कई मामलों में लापता होने के पीछे पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध, मानव तस्करी, मानसिक स्वास्थ्य या अन्य कारण हो सकते हैं, लेकिन उच्च संख्या और महिलाओं-बच्चों का अधिक होना चिंता बढ़ाता है।

महिलाओं और बच्चों पर बढ़ता खतरा

आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि दिल्ली में महिलाएं और लड़कियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। 15 दिनों में गायब हुईं 509 महिलाओं और लड़कियों में से अधिकांश किशोरियां हैं। नाबालिगों में 71% मामलों में अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। ये स्थिति पिछले वर्षों के ट्रेंड से भी जुड़ी है, जहां 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 लापता मामले दर्ज हुए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जल्द रिपोर्टिंग, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और सामुदायिक जागरूकता महत्वपूर्ण है।

क्या कर रही है पुलिस और समाज को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

दिल्ली पुलिस विभिन्न जिलों में ‘ऑपरेशन मिलाप’ जैसे अभियान चला रही है, जिसके तहत जनवरी में कई लोगों को ट्रेस किया गया। हालांकि, कुल संख्या के सामने ये प्रयास अपर्याप्त लगते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:

  • महिलाएं और बच्चे अकेले बाहर जाते समय परिवार को सूचित करें।
  • दिल्ली पुलिस की महिला हेल्पलाइन (1091), चाइल्डलाइन (1098) या ऐप्स जैसे ‘सुरक्षा ऐप’ का इस्तेमाल करें।
  • संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
  • मोबाइल लोकेशन शेयरिंग और इमरजेंसी बटन का उपयोग करें।

ये आंकड़े दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ा अलार्म हैं। महिला और बाल सुरक्षा के दावों के बावजूद ऐसी संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। आगे के दिनों में अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो कानून-व्यवस्था पर और ज्यादा दबाव बढ़ेगा। दिल्ली पुलिस से उम्मीद है कि वो इन मामलों की गहन जांच करे और लापता लोगों को जल्द ट्रेस करे।

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