महाराष्ट्र

21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी पर विवाद, पार्थ पवार की कंपनी ने नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

पार्थ पवार
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महाराष्ट्र में जमीन सौदे से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मामला सामने आया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने पंजीकरण विभाग द्वारा जारी किए गए 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी मांग नोटिस को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के समक्ष होगी।

क्या है 21 करोड़ रुपये का विवाद?

विभागीय सूत्रों के अनुसार, ये मामला पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित एक जमीन के बिक्री विलेख से जुड़ा है। पंजीकरण विभाग का दावा है कि जमीन की बिक्री के दौरान नियमानुसार स्टांप ड्यूटी का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया। इसी आधार पर विभाग ने करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करने का नोटिस जारी किया था, जिसकी अंतिम तारीख 10 फरवरी तय की गई थी। विभाग का कहना है कि नियमों के अनुसार बकाया राशि की वसूली की जानी चाहिए।

पहले भी जारी हो चुका है आदेश

इससे पहले पंजीकरण विभाग ने एक अन्य आदेश में अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी और उसके साझेदार दिग्विजय पाटिल को 40 एकड़ जमीन के सौदे के दौरान कथित रूप से माफ की गई स्टांप ड्यूटी जमा करने के निर्देश दिए थे।

उस आदेश में भी भुगतान की समयसीमा 10 फरवरी निर्धारित की गई थी। बताया जा रहा है कि ये जमीन सरकारी श्रेणी में आती है, जिसके कारण स्टांप शुल्क को लेकर विवाद और गहरा गया।

IGR के सामने होगी सुनवाई

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संबंधित कंपनी ने विभागीय आदेश के खिलाफ औपचारिक अपील दायर कर दी है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई पंजीकरण महानिरीक्षक (Inspector General of Registration – IGR) के समक्ष की जाएगी। हालांकि, अधिकारियों ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि कंपनी ने मूल आदेश को किन कानूनी आधारों पर चुनौती दी है।

300 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा मामला

सूत्रों के मुताबिक, 40 एकड़ जमीन का सौदा लगभग 300 करोड़ रुपये में हुआ था। ये मामला उस समय जांच के दायरे में आया, जब ये सामने आया कि संबंधित जमीन सरकारी श्रेणी की है और सौदे के दौरान स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इसी वजह से पंजीकरण विभाग ने मामले की समीक्षा कर अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी की मांग की।

कानूनी और प्रशासनिक असर

ये मामला अब प्रशासनिक स्तर से आगे बढ़कर कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। IGR के समक्ष सुनवाई के बाद ही ये स्पष्ट हो सकेगा कि स्टांप ड्यूटी की मांग उचित है या नहीं। जमीन की श्रेणी और शुल्क निर्धारण में क्या त्रुटि हुई और संबंधित पक्षों को कितनी राहत या देनदारी तय होगी।

मुंधवा जमीन सौदे से जुड़ा ये विवाद महाराष्ट्र में स्टांप ड्यूटी और जमीन पंजीकरण प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 21 करोड़ रुपये की मांग और 300 करोड़ रुपये के सौदे के बीच अब अंतिम निर्णय पंजीकरण महानिरीक्षक के स्तर पर होगा।

आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और उससे जुड़े दस्तावेजों से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

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