महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ सदस्य एकनाथ खडसे एक बार फिर गंभीर कानूनी विवादों के घेरे में हैं। जलगांव में एक वृद्ध महिला की शिकायत पर पुलिस ने पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे और उनकी बेटी शारदा खडसे के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर एक कीमती जमीन को अपने नाम कर लिया।
भरोसे के नाम पर विश्वासघात: क्या है आरोप?
शिकायतकर्ता वृद्ध महिला के अनुसार, यह मामला साल 2002 में शुरू हुआ था। उस समय एकनाथ खडसे ने महिला को विश्वास दिलाया था कि उनकी जमीन पर एक शुगर फैक्ट्री (चीनी मिल) स्थापित की जाएगी, जिससे क्षेत्र का विकास होगा और उन्हें लाभ मिलेगा। इसी विकास के नाम पर महिला से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए गए थे।
23 साल लंबी साजिश का पर्दाफाश
आरोप है कि 2002 से लेकर 2025 के दौरान, खडसे और उनकी बेटी ने सोची-समझी रणनीति के तहत सरकारी और निजी दस्तावेजों में हेरफेर किया। महिला को बिना बताए, फर्जी कागजातों के जरिए उस जमीन का स्वामित्व बदल दिया गया और उसे शारदा खडसे के नाम पर हस्तांतरित कर दिया गया। जब हाल ही में महिला को इस हेराफेरी की भनक लगी, तो उन्होंने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।
कानूनी और राजनीतिक हलचल
जलगांव पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन पुराने राजस्व रिकॉर्ड्स (Revenue Records) की जांच कर रही है, जिनमें पिछले दो दशकों में बदलाव किए गए हैं।
चूंकि एकनाथ खडसे पहले भी जमीन संबंधी विवादों के कारण जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं, इसलिए इस नई FIR ने उनकी राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर निष्पक्ष जांच का दबाव बनाया है, जबकि खडसे खेमे ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
सत्ता और रसूख के बीच एक वृद्ध महिला की जमीन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह खडसे परिवार के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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