महाराष्ट्र

फर्जी कैप्टन खरात का ‘खाता-काण्ड’: 130 बेनामी अकाउंट्स और सत्ता के गलियारों तक फैले जाल का पर्दाफाश!

खरात
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खुद को सेना का कैप्टन बताकर लोगों को ठगने वाले अशोक खरात के काले कारनामों की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, जांच एजेंसियां और आम जनता दोनों ही दंग हैं। विशेष जांच दल (SIT) की हालिया जांच ने एक ऐसे वित्तीय चक्रव्यूह का खुलासा किया है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

130 फर्जी खातों का मायाजाल

SIT की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि खरात ने साल 2021-22 के दौरान एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 130 फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। ये खाते किसी बड़े कमर्शियल बैंक में नहीं, बल्कि विभिन्न पतसंस्थाओं (Co-operative Credit Societies) में खोले गए थे ताकि बैंकिंग रडार से बचा जा सके।

मुख्य रूप से समता पतसंस्था और जगदंबा पतसंस्था में ये खाते सक्रिय पाए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन सभी 130 खातों में अशोक खरात खुद ‘नॉमिनी’ बना बैठा था, ताकि पैसों के लेनदेन पर उसका सीधा नियंत्रण रहे।

रिश्तेदारों और रसूखदारों के नामों का इस्तेमाल

सूत्रों के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल केवल पैसे छिपाने के लिए नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और ट्रांजेक्शन के लिए किया जा रहा था। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि:

* इनमें से कुछ खाते रुपाली चाकणकर के रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं।

* इसके अलावा, कई दिग्गज नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी इन संदिग्ध खातों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

यह सिर्फ एक ठगी का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध है जिसमें सफेदपोश चेहरों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।” — जांच टीम से जुड़े सूत्र

कैसे काम करता था खरात का ‘सिस्टम’?

अशोक खरात ने फर्जी ‘कैप्टन’ की वर्दी और रसूख का इस्तेमाल कर पहले लोगों का विश्वास जीता। इसके बाद, उसने पतसंस्थाओं के लचीले नियमों का फायदा उठाकर अलग-अलग नामों से खाते खुलवाए। SIT अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इन खातों में करोड़ों रुपये कहाँ से आए और किन-किन ‘बड़े नामों’ को इसका हिस्सा पहुँचाया गया।

जांच के घेरे में पतसंस्थाएं

इस खुलासे के बाद अब संबंधित पतसंस्थाओं के अधिकारी भी SIT की रडार पर हैं। सवाल यह उठता है कि बिना उचित वेरिफिकेशन (KYC) के एक ही व्यक्ति को 130 खातों में नॉमिनी कैसे बनाया गया? क्या इन संस्थाओं के प्रबंधन की इस ‘मायाजाल’ में मिलीभगत थी?

फर्जी कैप्टन खरात का यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें शामिल 130 खाते, बेनामी संपत्ति और रसूखदार नामों का कनेक्शन इशारा कर रहा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों से नकाब उतर सकता है। SIT की अगली कार्रवाई पर अब पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।

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