महाराष्ट्र

फर्जी कैप्टन के ‘सियासी कनेक्शन’ से हड़कंप: अंजली दमानिया का दावा—रूपाली चाकणकर से 177 बार बात, कॉल डिटेल्स ने मचाया बवाल

अंजली दमानिया
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महाराष्ट्र की राजनीति में ‘फर्जी कैप्टन’ अशोक खरात का मामला अब एक बड़े राजनीतिक भूकंप का रूप लेता जा रहा है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खरात के कॉल डिटेल्स (CDR) का हवाला देते हुए राज्य के शीर्ष नेताओं के साथ उसके संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दमानिया के दावों ने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री से लेकर कई कद्दावर मंत्रियों के नाम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ लंबी बातचीत का दावा
अंजली दमानिया ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। उनके दावों के अनुसार:

* एकनाथ शिंदे (उप-मुख्यमंत्री): खरात और शिंदे के बीच कुल 17 कॉल हुए। इसमें 10 इनकमिंग और 7 आउटगोइंग कॉल थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक बार दोनों के बीच लगातार 21 मिनट तक बातचीत हुई।
* रूपाली चाकणकर (राकांपा-अजित): पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के साथ खरात के संबंधों पर सबसे बड़ा दावा किया गया है। दमानिया के अनुसार, चाकणकर ने खरात को 177 कॉल किए।
* प्रतिभा चाकणकर: रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा के साथ खरात की बातचीत का आंकड़ा और भी बड़ा है, जो 236 कॉल तक पहुंचता है।

इन दिग्गज नेताओं के नाम भी आए सामने
दमानिया ने केवल चाकणकर और शिंदे ही नहीं, बल्कि भाजपा और राकांपा के अन्य बड़े नेताओं के कॉल रिकॉर्ड्स का भी उल्लेख किया है:
* चंद्रकांत पाटील (मंत्री): 8 कॉल।
* सुनील तटकरे (सांसद): 8 कॉल।
* आशीष शेलार (विधायक/नेता): 1 कॉल।

दमानिया का सवाल: “आखिर क्या थी बातचीत की वजह?”
अंजली दमानिया ने सीधे तौर पर राज्य सरकार और जांच एजेंसियों से सवाल किया है कि एक ‘फर्जी’ व्यक्ति, जो खुद को कैप्टन बताकर लोगों को ठग रहा था, उसकी राज्य के इतने प्रभावशाली नेताओं के साथ इतनी लंबी और बार-बार बातचीत का उद्देश्य क्या था?
उन्होंने कहा, “एक फर्जी कैप्टन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के इतने करीब कैसे पहुंच गया? 21 मिनट तक एक उप-मुख्यमंत्री से क्या चर्चा हो रही थी? इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और इन बातचीत का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।”

क्या है अशोक खरात मामला?
अशोक खरात पर आरोप है कि उसने खुद को भारतीय सेना का ‘कैप्टन’ बताकर न केवल आम जनता को ठगा, बल्कि राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर कई अनैतिक कार्यों को अंजाम दिया। हाल ही में उसके खिलाफ यौन शोषण और धोखाधड़ी के गंभीर मामले दर्ज हुए हैं, जिसके बाद से उसके संपर्कों की परतें खुलनी शुरू हुई हैं।

अंजली दमानिया के इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होना तय है। विपक्ष अब इन कॉल डिटेल्स को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि संबंधित नेता इन दावों पर क्या सफाई देते हैं और क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश देता है।

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