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मार्च में मई का अहसास: ‘Heatwave’ की समय से पहले दस्तक ने तोड़े रिकॉर्ड, उत्तर से पश्चिम तक झुलस रहा भारत

heatwave
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अभी मार्च का दूसरा सप्ताह ही बीता है और भारत के बड़े हिस्से ने भीषण गर्मी का सामना करना शुरू कर दिया है। राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है, जो सामान्य तौर पर अप्रैल के अंत या मई में देखने को मिलता है। मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है अगले तीन महीने यानी मई अंत तक लू (Heatwave) के दिन सामान्य से कहीं अधिक रहने वाले हैं।

तापमान का ‘असामान्य’ व्यवहार: आंकड़ों की जुबानी
देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5 से 12 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया जा रहा है। यह केवल गर्मी नहीं, बल्कि मौसम का एक खतरनाक बदलाव है।

राज्य/शहर वर्तमान तापमान सामान्य से अधिक विशेष टिप्पणी
दिल्ली 39°C | +5.1°C 15 साल में पहली बार मार्च की शुरुआत में 35°C पार।
अकोला (महाराष्ट्र) 40.9°C +5.0°C विदर्भ क्षेत्र में लू का प्रकोप शुरू।
बनिहाल (J&K) 26.0°C +10.0°C सामान्यतः यहाँ 16°C तापमान होना चाहिए।
कल्पा (हिमाचल) 22.0°C +12.0°C पहाड़ों पर सामान्य से दोगुनी गर्मी।

पहाड़ों पर पिघलती उम्मीदें
सबसे चौंकाने वाले आंकड़े उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों से आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, जहाँ इस समय ठंडी हवाएं चलनी चाहिए, वहां पारा सामान्य से 10-12 डिग्री ऊपर है। यह न केवल स्थानीय पर्यटन के लिए बुरा है, बल्कि ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और भविष्य में जल संकट का भी संकेत है।

मई तक ‘लू’ का साया: मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, मार्च मध्य से लेकर मई के अंत तक देश के अधिकांश हिस्सों में न केवल दिन का, बल्कि रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने वाला है।

हॉटस्पॉट राज्य: राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में लू के दिनों की संख्या सामान्य से काफी ज्यादा रहने की आशंका है।
कारण: प्री-मानसून गतिविधियों की कमी और शुष्क पश्चिमी हवाओं का हावी होना इस समय से पहले आई गर्मी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

बढ़ती गर्मी के संभावित प्रभाव
कृषि पर संकट: मार्च में अचानक बढ़ी गर्मी गेहूं जैसी रबी फसलों की कटाई से पहले उनकी गुणवत्ता और पैदावार को प्रभावित कर सकती है।
स्वास्थ्य जोखिम: समय से पहले लू चलने से ‘हीट स्ट्रोक’, डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ेंगी।
बिजली की मांग: एयर कंडीशनर और कूलरों के जल्दी इस्तेमाल से बिजली ग्रिड पर दबाव अभी से बढ़ना शुरू हो गया है।

मार्च के शुरुआती दिनों में 40 डिग्री का आंकड़ा छूना प्रकृति की एक स्पष्ट चेतावनी है। यह स्थिति हमें ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर करती है। आने वाले तीन महीने न केवल आम जनता के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों के प्रबंधन के लिए भी बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं।

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