अमेरिका में पढ़ाई करने गए भारतीय छात्रों के सामने इन दिनों एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में भारतीय स्टूडेंट्स को वहां नौकरी नहीं मिल पा रही है। स्थिति ये है कि जॉब इंटरव्यू के दौरान उनसे एक ही सवाल पूछा जा रहा है और उसी पर बातचीत खत्म हो जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियां इंटरव्यू की शुरुआत में ही पूछ रही हैं, “क्या आप अमेरिकी नागरिक हैं?” इस सवाल का जवाब अगर ‘नहीं’ होता है, तो उम्मीदवार को आगे बढ़ने का मौका ही नहीं दिया जा रहा।
ये स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय-अमेरिकी समुदाय को अमेरिका के सबसे सफल प्रवासी समुदायों में गिना जाता है। अमेरिका की कुल आबादी में भारतीय मूल के लोगों की हिस्सेदारी भले ही करीब 1.5 प्रतिशत ही हो, लेकिन शिक्षा, आय और नेतृत्व के स्तर पर उनका प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। टेक्नोलॉजी, बिजनेस, आर्ट, मीडिया, शिक्षा और अर्थशास्त्र जैसे लगभग हर क्षेत्र में भारतीय मूल के लोग शीर्ष पदों पर नजर आते हैं। कई मामलों में भारतीय-अमेरिकी, औसत अमेरिकी नागरिकों से बेहतर प्रदर्शन करते दिखते हैं। इसके बावजूद भारतीय छात्रों को नौकरी मिलने में बढ़ती दिक्कतें चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
विशेष रूप से F-1 वीजा पर अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। F-1 वीजा स्टूडेंट वीजा होता है, जो तब तक वैध रहता है जब तक छात्र का कोर्स पूरा नहीं हो जाता। कोर्स खत्म होने के बाद छात्रों को 60 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है, जिसमें वे अमेरिका में रह सकते हैं, लेकिन इसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ता है या फिर वीजा स्टेटस बदलने के लिए आवेदन करना होता है। नियमों के तहत F-1 वीजा पर पढ़ाई के दौरान और उसके बाद सीमित अवधि के लिए काम करने की अनुमति होती है, लेकिन मौजूदा हालात में कंपनियां गैर-अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देने से बचती नजर आ रही हैं।
एक और चिंताजनक संकेत ये है कि अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक थी, लेकिन इस साल इसमें करीब 44 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसे अमेरिका की बदलती नीतियों, वीजा से जुड़ी अनिश्चितताओं और रोजगार के घटते अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ट्रंप 2.0 के दौर में नीतियों में हुए बदलावों का असर अब शिक्षा और रोजगार दोनों पर साफ दिखने लगा है।
भारतीय छात्रों की इस मुश्किल को व्यक्तिगत अनुभव भी उजागर कर रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद की रहने वाली सुषमा पसुपुलेटी ने वर्ष 2023 में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी के लिए दाखिला लिया था। नौकरी की तलाश के दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में बताया कि एक जॉब फेयर में वो अपना रिज्यूमे लेकर एक स्टॉल से दूसरे स्टॉल तक जाती रहीं, लेकिन लगभग हर रिक्रूटर ने उनसे सबसे पहले यही सवाल पूछा कि क्या वो अमेरिकी नागरिक हैं। जैसे ही उन्होंने ‘नहीं’ कहा, बातचीत वहीं खत्म हो गई। सुषमा के अनुसार, कई रिक्रूटर्स ने तो उनका रिज्यूमे तक देखने की जरूरत नहीं समझी।
भारतीय छात्रों का ये अनुभव बताता है कि अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी नौकरी पाना अब पहले जितना आसान नहीं रहा। नागरिकता और वीजा स्टेटस एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहे हैं। ऐसे में अमेरिका जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए ये एक बड़ा संकेत है कि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ बदलते नियमों, नीतियों और रोजगार की वास्तविक स्थिति को भी गंभीरता से समझना होगा।
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