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गोल्ड क्रैश 2026: 43 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट, क्या खत्म हो गया सोने की चमक का दौर?

गोल्ड क्रैश 2026
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गोल्ड क्रैश 2026: कल तक निवेश का ‘सुरक्षित स्वर्ग’ माना जाने वाला सोना आज निवेशकों को चौंका रहा है। साल 2025 में 75% की तूफानी तेजी दिखाने के बाद, 2026 की पहली तिमाही पीली धातु के लिए ‘ब्लैक मार्च’ साबित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के सराफा बाजारों तक, सोने की कीमतों में आई भारी गिरावट ने बाजार पंडितों और निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

1. 1983 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट
जनवरी 2026 में सोना $5,608 प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर था, लेकिन मार्च आते-आते स्थितियां पूरी तरह बदल गईं।
* ग्लोबल रिकॉर्ड: मार्च के मध्य में सिर्फ सात दिनों के भीतर वैश्विक कीमतों में 10% की गिरावट दर्ज की गई। यह 1983 के बाद यानी पिछले 43 सालों की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट है।
* तिमाही का हाल: जनवरी के शिखर से अब तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 20-25% की कमी आ चुकी है।

2. भारतीय बाजार: ₹1.75 लाख से ₹1.46 लाख तक का सफर
भारत में सोने के प्रति दीवानगी जगजाहिर है, लेकिन हालिया आंकड़ों ने खरीदारों को राहत और निवेशकों को चिंता दी है।
* रिकॉर्ड गिरावट: 29 जनवरी 2026 को सोना ₹1,75,340 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
* मौजूदा स्थिति: आज देश के सराफा बाजारों में सोना औसतन ₹1,46,733 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसका मतलब है कि महज दो महीनों में कीमतें ₹28,607 प्रति 10 ग्राम तक गिर चुकी हैं।
* तुलनात्मक कमी: जनवरी से अब तक भारतीय बाजार में सोना करीब 16% सस्ता हो चुका है।

3. क्या कहता है भविष्य का अनुमान?
विश्लेषकों का मानना है कि इस साल अब सोने में किसी बड़े उछाल की गुंजाइश काफी कम है।
* BMI का अनुमान: फिच सॉल्यूशंस की इकाई बीएमआई (BMI) ने 2026 के लिए सोने की औसत कीमत $4,600 प्रति औंस रहने का अनुमान लगाया है। फिलहाल कीमतें $4,551 के करीब हैं, जिसका अर्थ है कि साल भर में अब केवल 1% की बढ़त की ही उम्मीद है।
* बार्गेन बायिंग (Bargain Buying): एक्सिस म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में इस भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। निवेशक इस गिरावट को ‘एंट्री पॉइंट’ के रूप में देख रहे हैं।

निवेश करें या इंतजार?
सोने की कीमतों में आई यह गिरावट वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती का परिणाम मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि 2025 जैसी असाधारण तेजी के बाद यह एक ‘हेल्दी करेक्शन’ (कीमतों का सामान्य होना) है।

हालांकि, मध्यम अवधि में सोने की चमक फीकी रह सकती है। जो लोग शादियों या व्यक्तिगत उपयोग के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका है, लेकिन कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को अभी ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनानी चाहिए।

फिलहाल बाजार में भारी अस्थिरता है। किसी भी बड़े निवेश से पहले पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का ध्यान जरूर रखें।

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