अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक विनाशकारी ‘जल युद्ध’ (Water War) में तब्दील हो चुका है। ईरान ने खाड़ी के तीन प्रमुख देशों—कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन—के वाटर डिसेलिनेशन (खारे पानी को मीठा बनाने वाले) प्लांट्स पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इन हमलों ने न केवल रेगिस्तानी देशों की जीवनरेखा को काट दिया है, बल्कि वहां रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
पानी की सप्लाई ठप, 25% हिस्सा प्रभावित
ईरान के इन हमलों के कारण खाड़ी के तीन देशों में शुद्ध पेयजल की 25% सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हुई है। सोमवार को कुवैत के दोहा वाटर प्लांट पर हुए भीषण हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत हो गई। ईरान अब तक यूएई के फुजारिया और बहरीन के अद-टर प्लांट को भी अपना निशाना बना चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है।
कुवैत पर सबसे बड़ा संकट, पलायन का डर
वाटर प्लांट्स पर हुए इन हमलों का सबसे घातक असर कुवैत पर पड़ा है। कुवैत अपनी 90% पेयजल आपूर्ति के लिए इन्हीं डिसेलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर है। कुवैत की कुल 50 लाख की आबादी में से लगभग 10 लाख भारतीय हैं, जिनकी जिंदगी अब दांव पर लगी है। पानी की कमी और युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर पलायन (Migration) शुरू होने की आशंका गहरा गई है।
90 लाख भारतीयों की सुरक्षा दांव पर
खाड़ी देशों में रहने वाले कुल 90 लाख भारतीयों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार:
* सऊदी अरब: सर्वाधिक 35 लाख भारतीय।
* संयुक्त अरब अमीरात (UAE): 25 लाख भारतीय।
* कुवैत: 10 लाख भारतीय।
ईरान द्वारा जीवन रक्षक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाए जाने के बाद इन भारतीयों की सुरक्षित वापसी या वहां उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भारत सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है।
युद्ध की नई रणनीति: प्यास को बनाया हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने रणनीतिक रूप से इन प्लांट्स को निशाना बनाया है क्योंकि खाड़ी के देशों के पास मीठे पानी के प्राकृतिक स्रोत न के बराबर हैं। पानी की किल्लत पैदा कर ईरान इन देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता को अस्थिर करना चाहता है। अमेरिका और ईरान के इस टकराव ने अब खाड़ी को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ प्यास और बारूद दोनों ही जानलेवा साबित हो रहे हैं।
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