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ग्वालियर: एक कार के लिए पति ने पत्नी और 4 माह की बच्ची पर फेंका तेजाब, वजह कर देगी परेशान

ग्वालियर
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मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद दर्दनाक और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां दहेज में कार की मांग पूरी न होने से नाराज़ एक पति ने अपनी पत्नी पर तेजाब फेंक दिया। इस अमानवीय हमले में पत्नी के साथ-साथ उसकी गोद में मौजूद चार महीने की मासूम बच्ची भी गंभीर रूप से झुलस गई। बहू को बचाने के लिए दौड़े ससुर भी एसिड की चपेट में आकर घायल हो गए।

शादी के कुछ ही दिनों बाद शुरू हुई दहेज की मांग

 मिली जानकारी के मुताबिक, डबरा निवासी योगिता अग्रवाल की शादी फरवरी 2024 में ग्वालियर के लोहिया बाजार निवासी मनन अग्रवाल से हुई थी। शादी के समय लड़की के परिवार ने अपनी क्षमता से अधिक खर्च किया था। लेकिन शादी के लगभग 15–20 दिन बाद ही ससुराल पक्ष ने दहेज में कार की मांग शुरू कर दी।

जब योगिता ने बताया कि उसके पिता कार देने की स्थिति में नहीं हैं, तब से उसे लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा। समय के साथ ये दबाव और बढ़ता गया।

नशे की हालत में घर पहुंचा और कर दिया हमला

बताया जा रहा है कि 1 मार्च की रात करीब 9 बजे आरोपी पति नशे की हालत में घर पहुंचा और फिर से कार की मांग को लेकर पत्नी से झगड़ा करने लगा। जब पत्नी ने इसका विरोध किया तो उसने गुस्से में आकर घर में रखा तेजाब उस पर फेंक दिया।

उस समय योगिता अपनी चार महीने की बच्ची को गोद में लिए हुई थी, जिससे वो भी एसिड की चपेट में आ गई।

पत्नी, मासूम बच्ची और ससुर हुए घायल

इस हमले में योगिता के हाथ और पैर बुरी तरह झुलस गए, जबकि बच्ची के चेहरे और हाथ पर भी एसिड गिरने से चोट आई। बहू को बचाने के लिए दौड़े ससुर महेंद्र अग्रवाल भी एसिड की बूंदों से घायल हो गए और उनके हाथ झुलस गए।

घटना के बाद परिजनों ने सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपी फरार

इलाज के बाद योगिता और उसकी बच्ची को मायके पक्ष अपने साथ डबरा ले गए। इसके बाद पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है।

दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल

ये घटना एक बार फिर समाज में मौजूद दहेज जैसी कुरीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शादी के बाद दहेज के लिए होने वाली प्रताड़ना और हिंसा आज भी कई महिलाओं की जिंदगी को खतरे में डाल रही है।

इस तरह की घटनाएं न केवल कानून और समाज के लिए चुनौती हैं, बल्कि यह भी याद दिलाती हैं कि दहेज प्रथा के खिलाफ सख्त जागरूकता और कार्रवाई की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।

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