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इंसानियत की मिसाल बने Harish Rana, डोनेट कर गए अपनी कॉर्निया

Harish Rana
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हरीश राणा (Harish Rana) का निधन मंगलवार को AIIMS Delhi में हुआ, जिसके बाद उनके परिजनों ने एक ऐसा निर्णय लिया जो कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को दिल्ली में किया गया, लेकिन जाने से पहले हरीश राणा ने अंगदान के जरिए मानवता की एक बड़ी मिसाल पेश की।

उनके निधन के बाद उनकी आंखों के कॉर्निया और हार्ट वाल्व दान किए गए हैं। यह अंग अब जरूरतमंद मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित किए जाएंगे, जिससे किसी की जिंदगी में नई रोशनी और जीवन मिल सकेगा।

क्या होता है कॉर्निया और क्यों है ये महत्वपूर्ण?

डॉक्टरों के अनुसार, कॉर्निया आंख का वो पारदर्शी बाहरी हिस्सा होता है, जिसे आम भाषा में आंख की काली परत कहा जाता है। ये कैमरे के लेंस की तरह काम करता है और रोशनी को आंख के अंदर प्रवेश कराने में मदद करता है।

जब किसी व्यक्ति का कॉर्निया खराब हो जाता है, तो उसे देखने में दिक्कत होती है या वो पूरी तरह दृष्टिहीन भी हो सकता है। ऐसे मामलों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट एक प्रभावी उपचार माना जाता है, जिसमें मृत व्यक्ति के स्वस्थ कॉर्निया को निकालकर जरूरतमंद मरीज की आंख में लगाया जाता है।

कैसे होता है कॉर्निया ट्रांसप्लांट?

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी व्यक्ति की मृत्यु के कुछ घंटों के भीतर कॉर्निया को सावधानीपूर्वक निकाल लिया जाता है। इसके बाद इसे आई बैंक में सुरक्षित रखा जाता है, जहां इसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है।

जांच के बाद उपयुक्त मरीज की पहचान कर कॉर्निया का मिलान किया जाता है। जब मैचिंग पूरी हो जाती है, तो सर्जरी के जरिए इसे मरीज की आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है। ऑपरेशन के बाद कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे मरीज की दृष्टि में सुधार होने लगता है।

क्या पूरी तरह लौट सकती है रोशनी?

डॉक्टरों का मानना है कि अगर मरीज की आंख के अन्य हिस्से स्वस्थ हैं और सर्जरी सफल रहती है, तो कॉर्निया ट्रांसप्लांट के बाद दृष्टि काफी हद तक या पूरी तरह वापस आ सकती है। इस प्रक्रिया से कई लोगों को नई जिंदगी मिलती है।

अंगदान से मिली नई उम्मीद

हरीश राणा (Harish Rana) के इस कदम ने ये साबित कर दिया कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के जीवन में रोशनी ला सकता है। उनके द्वारा दान किया गया कॉर्निया दो अलग-अलग लोगों की आंखों की रोशनी वापस ला सकता है।

उनके परिजनों का ये निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो ये संदेश देता है कि अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है।

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