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ईरान-अमेरिका युद्ध की तपिश: भारत में औद्योगिक डीजल और प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

ईरान
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय बाजार में ईंधन की कीमतों में खलबली मचा दी है। शुक्रवार को तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक (इंडस्ट्रियल) डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी का एलान किया। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित होने का सीधा असर अब घरेलू कीमतों पर दिखने लगा है।

कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि: एक नज़र में
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारत में ईंधन के दामों में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:
* प्रीमियम पेट्रोल: इसमें 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 99.89 रुपये से बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
* औद्योगिक डीजल: इसमें सबसे बड़ा उछाल देखा गया है। इसके दाम 21.92 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं, जिससे दिल्ली में यह 87.67 रुपये से सीधे 109.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

किन पर पड़ेगा इस बढ़ोतरी का असर?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस वृद्धि का सीधा असर आम आदमी के इस्तेमाल वाले साधारण पेट्रोल और डीजल पर नहीं पड़ेगा।
* लक्जरी कारें और हाई-एंड SUV: प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी जैसी लक्जरी कारों और महंगी स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (SUV) में होता है।
* भारी उद्योग और परिवहन: औद्योगिक डीजल के मुख्य खरीदारों में भारतीय रेलवे, राज्य परिवहन (रोडवेज) की बसें, बड़ी फैक्ट्रियां, अस्पताल, और बड़े शॉपिंग मॉल्स शामिल हैं। ये संस्थान सीधे तेल कंपनियों से टैंकरों के जरिए थोक में डीजल मंगवाते हैं।

आम जनता के लिए राहत की खबर
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “कुल डीजल बिक्री में औद्योगिक डीजल की हिस्सेदारी मात्र 2 से 4 प्रतिशत ही है। चूंकि साधारण पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, इसलिए आम उपभोक्ता पर इसका कोई सीधा वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।”

ब्रेंट क्रूड में 48% का उछाल
युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। महज 20 दिनों के भीतर ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और अधिक अस्थिर हो सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

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