एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर फ्लीट में एक बार फिर सुरक्षा संबंधी चिंता बढ़ गई है। लंदन हीथ्रो से बेंगलुरु आने वाले फ्लाइट AI-132 में पायलट ने बाएं इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच (FCS) में असामान्य व्यवहार देखा, जिसके बाद विमान को ग्राउंड कर दिया गया। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने मंगलवार को इस विमान (रजिस्ट्रेशन VT-ANX) की गहन जांच शुरू कर दी है। ये घटना पिछले साल जून में हुए एयर इंडिया AI-171 क्रैश की जांच के बीच हुई है, जहां भी फ्यूल कंट्रोल स्विच की भूमिका पर सवाल उठे थे।
क्या है पूरा मामला?
1 फरवरी 2026 को लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट पर इंजन स्टार्टअप के दौरान पायलट ने बाएं फ्यूल कंट्रोल स्विच को हल्के से दबाकर लॉक चेक किया। स्विच ‘RUN’ पोजीशन से ‘CUTOFF’ (ऑफ) में चला गया, जबकि इसे लॉक रहना चाहिए था। ये दो बार हुआ। फ्यूल कंट्रोल स्विच में दो-चरणीय सुरक्षा फीचर होता है – पहले लिफ्ट करना पड़ता है, फिर मूवमेंट। ये अनजाने में इंजन बंद होने से बचाता है। तीसरी बार स्विच ठीक रहा, जिसके बाद फ्लाइट बेंगलुरु पहुंची। लैंडिंग के बाद पायलट ने लॉगबुक में दर्ज किया: “…जब हल्के से दबाया गया तो बांया कंट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘ऑफ’ में चला गया, ये अपनी जगह लॉक नहीं होता है।”
विमान को बेंगलुरु में आगे की उड़ानों से रोक दिया गया। एयर इंडिया ने इसे प्रिकॉशनरी ग्राउंडिंग बताया और DGCA को सूचित किया।
स्विच की उम्र और स्थिति
जांच में पता चला कि प्रभावित फ्यूल कंट्रोल स्विच करीब 3,500 घंटे इस्तेमाल में आया था। मूल उपकरण निर्माता (OEM) के अनुसार, ऐसे स्विच की कुल सर्विस लाइफ 20,000 घंटे तक होती है। यानी ये स्विच अभी काफी नया था और उम्र के कारण फेल नहीं हुआ। इसे बदलने के बाद विस्तृत विश्लेषण के लिए OEM को भेजा जाएगा।
एयर इंडिया और बोइंग की प्रतिक्रिया
एयर इंडिया ने सभी 33 बोइंग 787 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच लैच की फ्लीट-वाइड प्रिकॉशनरी जांच शुरू कर दी है। पायलटों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि स्विच का ठीक से निरीक्षण करें। बोइंग से संपर्क में हैं और प्राथमिकता पर समीक्षा हो रही है। एयर इंडिया ने कहा कि पिछले साल DGCA के निर्देश पर पूरी फ्लीट की जांच हो चुकी थी और कोई समस्या नहीं मिली थी। यात्री और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
DGCA की भूमिका और जांच
DGCA ने VT-ANX का निरीक्षण शुरू किया है। अनुमति के बाद प्रभावित स्विच बदलकर वैकल्पिक लगाया जाएगा। जांच में ये देखा जाएगा कि क्या ये मैकेनिकल फेलियर, डिजाइन इश्यू या अन्य कारण है। ये घटना AI-171 क्रैश (12 जून 2025, अहमदाबाद) की जांच से जुड़ती है, जहां टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ में चले गए थे, जिससे ड्यूल इंजन फेलियर हुआ और 260 लोगों की मौत हुई।
फ्यूल कंट्रोल स्विच इंजन फ्यूल फ्लो को नियंत्रित करता है। अनजाने मूवमेंट से इंजन शटडाउन का खतरा रहता है। 2018 में FAA ने भी 787 के स्विच में संभावित मैलफंक्शन की चेतावनी दी थी। ये घटना फ्लीट की जांच की पर्याप्तता पर सवाल उठाती है और DGCA से सख्त कार्रवाई की उम्मीद है।
एयर इंडिया के 787 फ्लीट में ये पहला ऐसा मामला नहीं, लेकिन पिछले क्रैश के बाद बढ़ी सतर्कता के बावजूद नया इश्यू चिंता बढ़ाता है। जांच के नतीजे आने के बाद आगे के कदम तय होंगे। यात्री सुरक्षा के लिए एहतियात बरती जा रही है।
ये भी पढ़ें: दिल्ली में लापता होने का संकट: 15 दिनों में 807 गायब, 509 महिलाएं और 191 बच्चे – 572 अब भी नहीं मिले































