Oil-Gas Auditing Course: मुंबई, जो भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में जानी जाती है, एक बार फिर शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा रही है। 8 मई 2025 को, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) मुंबई ने भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के कार्यालय के साथ मिलकर एक अनूठा कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का नाम है ‘ऑडिटिंग लेंस: तेल और गैस सेक्टर’, जो तेल और गैस ऑडिटिंग (Oil and Gas Auditing) पर केंद्रित है। यह सप्ताह भर चलने वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम तेल और गैस क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स ऑडिटिंग की विशेषज्ञता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस लेख में हम इस IIM मुंबई प्रशिक्षण (IIM Mumbai Training) की पूरी कहानी को सरल और रोचक तरीके से समझेंगे, जो नई पीढ़ी के लिए जानकारीपूर्ण और प्रेरणादायक है।
तेल और गैस क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल ऊर्जा की आपूर्ति करता है, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी देता है। लेकिन इस क्षेत्र की जटिल आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ ऑडिटिंग की जरूरत होती है। यहीं से IIM मुंबई और CAG का यह संयुक्त प्रयास महत्वपूर्ण हो जाता है। इस कार्यक्रम में देश भर से 30 से अधिक सरकारी ऑडिटर हिस्सा ले रहे हैं, जो इस क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। नई पीढ़ी, जो तकनीक और प्रबंधन के क्षेत्र में रुचि रखती है, इस तरह के कार्यक्रमों से प्रेरणा ले सकती है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत IIM मुंबई के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी के नेतृत्व में हुई, जिन्होंने इसके शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। प्रोफेसर विवेकानंद बी. खानापुरी, जो डीन SRIC हैं, ने पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया कि यह तेल और गैस क्षेत्र की वर्तमान जरूरतों को पूरा करे। CAG के क Sanjay Murthy ने इस कार्यक्रम की परिकल्पना की, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संदर्भ में लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों को संबोधित करना है। इसके अलावा, ऑडिट के प्रधान निदेशक (शिपिंग) विजय कोठारी ने भी इस कार्यक्रम को क्षेत्रीय प्रासंगिकता के साथ तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह सहयोग न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे विभिन्न संस्थान मिलकर देश के लिए काम कर सकते हैं।
कार्यक्रम का पहला दिन बेहद प्रभावशाली रहा। प्रोफेसर तिवारी ने तेल और गैस की मूल्य श्रृंखला पर एक व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने लॉजिस्टिक्स की जटिलताओं और ऑडिटिंग के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। यह सत्र नई पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक था, जो आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और ऑडिटिंग जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने की सोच रही है। इसके बाद, पूर्व निदेशक जनरल ऑफ शिपिंग दीपक शेट्टी ने वैश्विक समुद्री व्यापार नियमों, बंदरगाह लॉजिस्टिक्स, और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में ऑडिटिंग के पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए। यह सत्र न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि यह भी दर्शाता था कि वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
दिन के अंत में, आपूर्ति श्रृंखला विशेषज्ञ रूमा किशोर ने तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम प्रबंधन और परिचालन कमजोरियों पर एक सत्र लिया। उनके इस सत्र ने ऑडिटरों को यह समझने में मदद की कि कैसे छोटी-छोटी गलतियां बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। यह जानकारी नई पीढ़ी के लिए भी उपयोगी है, जो तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्रों में गलतियों से बचने के महत्व को समझती है। तेल और गैस ऑडिटिंग (Oil and Gas Auditing) जैसे विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षण न केवल पेशेवरों की क्षमता बढ़ाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि भारत का तेल और गैस क्षेत्र अधिक पारदर्शी और कुशल बने।
यह कार्यक्रम केवल ऑडिटरों के लिए नहीं था। इसमें उद्योग विशेषज्ञों और शैक्षणिक गुरुओं की भागीदारी ने इसे और व्यापक बना दिया। तेल और गैस क्षेत्र की जटिलताओं को समझने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण जरूरी हैं, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी, जो डिजिटल युग में रहती है और त्वरित जानकारी की आदी है, इस तरह के कार्यक्रमों से यह सीख सकती है कि तकनीक और प्रबंधन का सही उपयोग देश को कैसे मजबूत बना सकता है। IIM मुंबई प्रशिक्षण (IIM Mumbai Training) की यह पहल एक मिसाल है कि शिक्षा और प्रशासनिक सहयोग से कितना कुछ हासिल किया जा सकता है।
मुंबई, जो हमेशा से नवाचार और शिक्षा का केंद्र रही है, इस कार्यक्रम के माध्यम से एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है। IIM मुंबई का यह प्रयास न केवल सरकारी ऑडिटरों को सशक्त बनाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि तेल और गैस क्षेत्र में भारत की आपूर्ति श्रृंखला वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। यह कहानी न केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम की है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे भारत अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने के लिए तैयार है। यह नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने करियर में विशेषज्ञता और राष्ट्रीय सेवा को जोड़ना चाहती है।
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