भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि दुनिया को हथियार बेचने वाला एक ‘डिफेंस हब’ बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने न केवल पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत के बढ़ते वर्चस्व पर मुहर लगा दी है।
आंकड़ों की ‘बड़ी छलांग’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया के जरिए देश को यह गौरवशाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात सालाना आधार पर 62 प्रतिशत से अधिक की अविश्वसनीय वृद्धि के साथ 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण शक्ति (Manufacturing Power) की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
रक्षा मंत्री का संदेश: ‘सफलता की शानदार कहानी’
राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत के रक्षा इतिहास का एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “यह ‘बड़ी छलांग’ भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा निर्यात में सफलता की एक ऐसी कहानी लिख रहा है, जिसने दुनिया को अचंभित कर दिया है।”
क्यों बढ़ा भारत का ग्राफ? (मुख्य कारक)
भारत के रक्षा निर्यात में इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं:
* स्वदेशी तकनीक का दम: तेजस फाइटर जेट, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और आर्टिलरी गन की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ी है।
* पॉलिसी रिफॉर्म्स: सरकार द्वारा निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण और ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ ने रक्षा कंपनियों को वैश्विक मंच प्रदान किया।
* निजी क्षेत्र की भागीदारी: निजी रक्षा कंपनियों के योगदान ने उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में भारी सुधार किया है।
* वैश्विक कूटनीति: मित्र देशों के साथ रक्षा सौदों और रणनीतिक साझेदारी ने नए बाजारों के द्वारा इस रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद, भारत अब अगले कुछ वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस गति से भारतीय रक्षा स्टार्टअप और पीएसयू (PSUs) नवाचार कर रहे हैं, भारत जल्द ही दुनिया के शीर्ष 10 रक्षा निर्यातक देशों में अपनी जगह पक्की कर लेगा।
38,424 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की सिद्धि है। यह वैश्विक मंच पर भारत की बदलती छवि और मजबूत होती सामरिक शक्ति का प्रतीक है।
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