देश और दुनिया की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में शामिल जोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बू इन दिनों अपने निजी जीवन को लेकर सुर्खियों में हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे तलाक मामले में अदालत ने श्रीधर वेम्बू को 1.7 अरब डॉलर (करीब 14,000 करोड़ रुपये) का बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया है। इसे अब तक का भारत का सबसे महंगा तलाक माना जा रहा है।
कैलिफोर्निया कोर्ट का बड़ा आदेश
जनवरी 2025 में कैलिफोर्निया की सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा कि श्रीधर वेम्बू को ये भारी भरकम बॉन्ड राशि जमा करनी होगी, ताकि वैवाहिक संपत्ति को लेकर उनकी पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के अधिकारों की सुरक्षा की जा सके। अदालत का मानना है कि इस बॉन्ड के जरिए संभावित आर्थिक नुकसान से बचाव किया जा सकेगा।
कस्टडी और जोहो की हिस्सेदारी बना विवाद की जड़
इस हाई-प्रोफाइल तलाक का मुख्य कारण बच्चे की कस्टडी और जोहो कॉर्पोरेशन में हिस्सेदारी को लेकर विवाद बताया जा रहा है। मामला उस वैवाहिक संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा है, जो श्रीधर वेम्बू और प्रमिला श्रीनिवासन ने कैलिफोर्निया में रहते हुए अर्जित की थी।
अमेरिका में पढ़ाई, वहीं हुई शादी
आईआईटी मद्रास से स्नातक करने के बाद श्रीधर वेम्बू वर्ष 1989 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने अमेरिका गए थे। अमेरिका में रहने के दौरान ही उन्होंने 1993 में उद्यमी प्रमिला श्रीनिवासन से विवाह किया। करीब तीन दशक तक ये दंपति कैलिफोर्निया में रहा। दोनों का एक 26 वर्षीय बेटा भी है।
जोहो की स्थापना और भारत वापसी
साल 1996 में श्रीधर वेम्बू ने अपने साथियों के साथ मिलकर एडवेंटनेट नाम की एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की, जिसे 2009 में बदलकर जोहो कॉर्पोरेशन कर दिया गया।
वर्ष 2019 में वेम्बू अमेरिका छोड़कर भारत लौट आए और तमिलनाडु के अपने पैतृक गांव मथलमपराई से ही जोहो के कामकाज की निगरानी करने लगे।
पत्नी के गंभीर आरोप
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2021 में श्रीधर वेम्बू ने तलाक के लिए याचिका दायर की थी। इसके बाद प्रमिला श्रीनिवासन ने आरोप लगाया कि वेम्बू ने कंपनी के अधिकांश शेयर जानबूझकर अपनी बहन राधा वेम्बू और भाई शेखर वेम्बू को ट्रांसफर कर दिए हैं, ताकि वैवाहिक संपत्ति का दायरा कम किया जा सके।
वर्तमान में राधा वेम्बू के पास जोहो में लगभग 47.8% हिस्सेदारी, जबकि शेखर वेम्बू के पास 35.2% हिस्सेदारी बताई जाती है। वहीं श्रीधर वेम्बू के पास खुद कंपनी की केवल 5% हिस्सेदारी है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 225 मिलियन डॉलर आंकी गई है।
आरोपों को वेम्बू ने बताया निराधार
श्रीधर वेम्बू ने पत्नी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें मनगढ़ंत और तथ्यहीन बताया है। उनका कहना है कि कंपनी की हिस्सेदारी और प्रबंधन से जुड़े फैसले पूरी तरह व्यवसायिक और पारदर्शी रहे हैं।
क्यों ऐतिहासिक माना जा रहा है ये तलाक
1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड आदेश न सिर्फ कानूनी दृष्टि से बल्कि आर्थिक रूप से भी इस मामले को बेहद खास बनाता है। इतनी बड़ी राशि के कारण इसे भारत के इतिहास का सबसे महंगा तलाक कहा जा रहा है। ये मामला कॉर्पोरेट जगत में वैवाहिक संपत्ति, शेयरहोल्डिंग और पारिवारिक अधिकारों को लेकर एक अहम उदाहरण बन सकता है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में अदालत का अंतिम फैसला क्या होता है और इसका असर जोहो कॉर्पोरेशन व इसके नेतृत्व पर किस तरह पड़ता है।
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