मुंबई/ठाणे: मुंबई और उपनगरों की पहचान माना जाने वाला किफायती ‘वडापाव’ अब आम आदमी की थाली से दूर होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी ईंधन संकट और गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने इस लोकप्रिय स्ट्रीट फूड की कीमतों में आग लगा दी है। जो वडापाव कुछ समय पहले तक 15-20 रुपये में आसानी से मिल जाता था, अब उसकी कीमत 25 से 30 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
संकट में स्ट्रीट फूड: ठाणे के 60% स्टॉल बंद
ईंधन आपूर्ति पर अंतरराष्ट्रीय तनाव (अमेरिका-ईरान जंग) का असर अब स्थानीय स्तर पर दिखने लगा है। एलपीजी गैस की उपलब्धता घटने से छोटे होटल और वडापाव विक्रेताओं के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकेले ठाणे क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत छोटे होटल और स्ट्रीट फूड स्टॉल अस्थाई रूप से बंद हो चुके हैं, क्योंकि वे बढ़ती लागत और गैस की कमी को झेलने में असमर्थ हैं।
गैस नहीं तो चूल्हा सही, पर लागत वहां भी भारी
गैस सिलेंडर न मिलने के कारण कई विक्रेता अब पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। लेकिन यहाँ भी राहत नहीं है:
* लकड़ी और कोयला: लकड़ी के दामों में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे चूल्हे पर खाना बनाना भी महंगा साबित हो रहा है।
* कच्चा माल: खाद्य तेल की कीमतों में 30 से 40 रुपये तक का उछाल आया है। इसके साथ ही बेसन, आलू और मसालों की महंगाई ने विक्रेताओं की कमर तोड़ दी है।
विक्रेता प्रसाद म्हात्रे ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, “सभी सामग्रियों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऊपर से गैस नहीं मिल रही, जिससे हमें मजबूरी में चूल्हे पर वडा तलना पड़ रहा है। ऐसे में दाम बढ़ाए बिना धंधा बचाना नामुमकिन है।”
बेकरी उद्योग पर भी ताला, पाव की किल्लत
सिर्फ वडा ही नहीं, बल्कि ‘पाव’ की आपूर्ति भी संकट में है। बेकरी उद्योग पूरी तरह गैस और ईंधन पर निर्भर है। गैस संकट के कारण कई बेकरियां बंद हो गई हैं, जिससे पाव की सप्लाई घट गई है और उसकी कीमतें बढ़ गई हैं। कुछ जगहों पर अब पुराने ढर्रे की कोयले वाली बेकरियों पर निर्भरता बढ़ गई है, लेकिन वे मांग पूरी करने में सक्षम नहीं हैं।
महंगाई का दुष्चक्र
वडापाव की बढ़ती कीमतें केवल एक खाद्य पदार्थ की महंगाई नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि वैश्विक ईंधन संकट कैसे एक आम रेहड़ी-पटरी वाले और दिहाड़ी मजदूर के भोजन को प्रभावित कर रहा है। यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में कई और पारंपरिक व्यंजन आम आदमी की पहुंच से बाहर हो ।































