पाकिस्तान का अशांत इलाका बलूचिस्तान एक बार फिर हिंसा और संघर्ष की आग में झुलस उठा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ को अंजाम दिया है। इस अभियान के तहत एक साथ कई इलाकों में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के ठिकानों को निशाना बनाया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, BLA के लड़ाकों ने क्वेटा, नोशकी, माष्टुंग, दलबदिन, कलाट और बुलेडा जैसे रणनीतिक रूप से अहम इलाकों में समन्वित हमले किए। इन हमलों में कम से कम 12 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर सामने आई है, जबकि कई अन्य के घायल होने की भी आशंका जताई जा रही है।
हमलों की प्रकृति से साफ है कि ये कोई अलग-थलग कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित अभियान था। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, BLA ने सैन्य चौकियों, काफिलों और खुफिया ठिकानों को विशेष रूप से निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है।
बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा है कि ये अभियान बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, संसाधनों के शोषण और सैन्य दमन के विरोध में चलाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि जब तक बलूच जनता को उनके अधिकार नहीं मिलते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
इन हमलों के बाद पूरे बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई इलाकों में सैन्य गश्त बढ़ा दी गई है और संचार सेवाओं पर भी आंशिक पाबंदियां लगाए जाने की खबरें हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से अब तक इन हमलों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ बलूच विद्रोह के नए चरण की ओर इशारा करता है, जो आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए आंतरिक सुरक्षा की बड़ी चुनौती बन सकता है। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही अस्थिरता न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा, बल्कि पाकिस्तान की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डाल सकती है।































