Iran-US Tensions: मध्य पूर्व (Middle East) एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है जहाँ बारूद की एक चिंगारी पूरे क्षेत्र को आग की लपटों में झोंक सकती है। अमेरिका द्वारा पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा। सोमवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान में दहाड़ते हुए कहा, “इतिहास गवाह है कि ईरानियों ने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया।”
अमेरिका की भारी घेराबंदी: ट्रम्प की युद्ध नीति?
पेंटागन ने इस समय क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। आंकड़ों और स्थिति पर गौर करें तो:
- नौसेना की तैनाती: अमेरिका ने अपनी नौसेना के लगभग एक-तिहाई जहाज इस क्षेत्र में झोंक दिए हैं।
- विमानवाहक पोत: इजरायल के तट पर अवाक्स (AWACS) विमानों की निरंतर गश्त जारी है और दूसरा विमानवाहक पोत भी जल्द ही पहुँचने वाला है।
- ट्रम्प का रुख: ये संकेत स्टीव विटकॉफ जैसे दूतों की सक्रियता के बीच मिल रहे हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किसी भी समय एक बड़े हवाई अभियान (Aerial Campaign) का आदेश दे सकते हैं।
ईरान का पलटवार: “हम केवल रक्षा नहीं, हमला करेंगे”
ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है कि वे किसी ‘सीमित हमले’ के भ्रम में न रहें। “कोई भी हमला, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, युद्ध की घोषणा माना जाएगा। हमारी सेना 24 घंटे अलर्ट पर है और हम केवल रक्षा नहीं करेंगे, बल्कि आक्रामक जवाबी हमला करेंगे।” — इस्माइल बघाई, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का वह घातक बेड़ा है, जिसने पिछले साल के 12 दिवसीय युद्ध में इजरायली सुरक्षा घेरों (Iron Dome) की सीमाओं को चुनौती दी थी।
ट्रम्प की दुविधा: युद्ध या समझौता?
वाशिंगटन के सामने इस समय एक बड़ा ‘रणनीतिक संकट’ है। एक सीमित हमला ईरान के हौसलों को तोड़ने में नाकाम रहेगा, जबकि बड़ी सैन्य कार्रवाई अमेरिका को एक ऐसे अनिश्चित युद्ध में धकेल सकती है जिसका अंत किसी को नहीं पता।
26 फरवरी: जिनेवा में कूटनीति की आखिरी उम्मीद
युद्ध के बादलों के बीच शांति की एक महीन किरण भी दिखाई दे रही है। ओमान की मध्यस्थता में आगामी 26 फरवरी (गुरुवार) को जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण बातचीत होनी है।
- ईरान की शर्त: विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कर दिया है कि वे किसी ‘अस्थायी समझौते’ (Stop-gap deal) को स्वीकार नहीं करेंगे। चर्चा केवल प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने वाले स्थायी समाधान पर ही होगी।
- यूरेनियम संवर्धन: अरागची का दावा है कि पर्दे के पीछे की बातचीत में अमेरिका ने ‘जीरो संवर्धन’ की शर्त नहीं रखी है, जो सार्वजनिक बयानों के ठीक उलट है।
दुनिया की नजरें अब 26 फरवरी की वार्ता पर टिकी हैं। यदि कूटनीति विफल रहती है, तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिका के जंगी जहाज और ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें एक विनाशकारी अध्याय की शुरुआत कर सकती हैं।































