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‘Law will take its course: Fadnavis’: मराठी सम्मान या हिंसा का रास्ता – फडणवीस ने दी चेतावनी, बोले कानून अपना काम करेगा

'Law will take its course: Fadnavis': मराठी सम्मान या हिंसा का रास्ता - फडणवीस ने दी चेतावनी, बोले कानून अपना काम करेगा

‘Law will take its course: Fadnavis’ मुंबई की सड़कों पर एक बार फिर से भाषा को लेकर विवाद गर्म हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में एक बयान दिया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। उन्होंने कहा कि जो लोग महाराष्ट्र में रहते हैं और मराठी बोलने से इनकार करते हैं, उन्हें उनकी पार्टी “थप्पड़” मारने से पीछे नहीं हटेगी। इस बयान के बाद मंगलवार को मुंबई के पवई इलाके में तीन एमएनएस कार्यकर्ताओं ने एक चौकीदार को कथित तौर पर इसलिए थप्पड़ मार दिया, क्योंकि वह मराठी नहीं बोल रहा था। इस घटना ने नई पीढ़ी के बीच चर्चा छेड़ दी है, जो सोशल मीडिया पर हर मुद्दे को गहराई से देखती है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मराठी भाषा की मांग करना गलत नहीं है। सरकार भी चाहती है कि “मराठी भाषा” (Marathi language) का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा हो। लेकिन उन्होंने साफ किया कि अगर कोई कानून को अपने हाथ में लेगा, तो “कानून अपना काम करेगा” (Law will take its course)। फडणवीस का यह बयान एक संतुलित नजरिया पेश करता है, जो नई पीढ़ी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि भाषा का सम्मान जरूरी है, लेकिन हिंसा का रास्ता सही नहीं।

यह विवाद तब शुरू हुआ, जब राज ठाकरे ने रविवार को शिवाजी पार्क में अपनी पार्टी के वार्षिक गुड़ी पड़वा रैली में यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई में मराठी का सम्मान होना चाहिए। उनके मुताबिक, हर राज्य की अपनी भाषा होती है, और उसे अपनाना जरूरी है। लेकिन उनके इस बयान के बाद जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। पवई में हुई घटना के अलावा, मुंबई के एक बैंक में भी एक अधिकारी को मराठी न बोलने की वजह से धमकी दी गई। ये घटनाएं दिखाती हैं कि भाषा का मुद्दा कितना संवेदनशील हो सकता है।

पवई की घटना में तीन एमएनएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। चौकीदार के साथ हुई इस मारपीट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। कोई इसे मराठी संस्कृति की रक्षा का तरीका बता रहा है, तो कोई इसे गलत ठहरा रहा है। कांग्रेस नेता नसीम खान ने इसे राजनीतिक चाल बताया। उन्होंने कहा कि 2009 में भी विधानसभा चुनाव से पहले एमएनएस ने ऐसी ही रणनीति अपनाई थी। अब बीएमसी चुनाव नजदीक हैं, तो फिर से वही भाषा का मुद्दा उठाया जा रहा है। खान का मानना है कि भाषा के नाम पर हिंसा को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।

महाराष्ट्र में मराठी भाषा का महत्व कोई नई बात नहीं है। यह राज्य की पहचान का हिस्सा है। सरकार ने भी इसे बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे स्कूलों में मराठी को अनिवार्य करना और सरकारी दफ्तरों में इसका इस्तेमाल जरूरी करना। लेकिन जब बात हिंसा की आती है, तो सवाल उठता है कि क्या यह सही रास्ता है। फडणवीस ने अपनी बात में यही संदेश देने की कोशिश की कि “मराठी भाषा” (Marathi language) को सम्मान देना जरूरी है, लेकिन “कानून अपना काम करेगा” (Law will take its course) अगर कोई गलत तरीके अपनाएगा।

यह पूरा मामला आज के युवाओं के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गया है। एक तरफ भाषा और संस्कृति का सम्मान है, तो दूसरी तरफ शांति और सहयोग का माहौल बनाए रखना। पवई में चौकीदार के साथ हुई घटना हो या बैंक में दी गई धमकी, ये सब हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हिंसा से कोई समाधान निकल सकता है। राज ठाकरे का बयान और उसके बाद की घटनाएं इस बहस को और गहरा कर रही हैं।

मुंबई जैसे शहर में, जहां हर दिन लाखों लोग अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों से आते हैं, वहां आपसी समझ बहुत जरूरी है। मराठी महाराष्ट्र की आत्मा है, लेकिन इसे बढ़ावा देने का तरीका हर किसी के लिए अलग हो सकता है। फडणवीस का बयान और पुलिस की कार्रवाई इस बात का संकेत देती है कि कानून हर किसी के लिए बराबर है, चाहे वह किसी भी पक्ष में हो। यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, और आने वाले दिन इस मुद्दे पर और रोशनी डाल सकते हैं।


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