मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हैरान करने वाला और साइबर क्राइम से जुड़ा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ एक राजनीतिक नेता को परेशान कर दिया, बल्कि डिजिटल दौर में बढ़ते फर्जीवाड़े पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता सदाशिव यादव उस वक्त सकते में आ गए, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी ही शादी का कार्ड वायरल होते देखा।
बिना शादी तय हुए छप गया कार्ड
जानकारी के मुताबिक, सदाशिव यादव की न तो कोई शादी तय हुई थी और न ही परिवार में ऐसी कोई चर्चा चल रही थी। इसके बावजूद अचानक एक शादी का कार्ड सामने आया, जिसमें दूल्हे के रूप में उनका नाम, फोटो और पारिवारिक विवरण तक शामिल था। ये कार्ड सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गया।
रिश्तेदारों और परिचितों के फोन से बढ़ी मुश्किल
कार्ड वायरल होते ही नेता जी के पास रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के फोन आने लगे। कोई बधाई दे रहा था तो कोई शादी की तारीख और कार्यक्रम की जानकारी पूछ रहा था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सदाशिव यादव को खुद आगे आकर लोगों को सफाई देनी पड़ी।
उन्होंने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से अपील की कि वे इस फर्जी कार्ड पर भरोसा न करें और कथित शादी समारोह में शामिल होने न आएं।
साइबर अपराध की आशंका
इस पूरे मामले को साइबर अपराध से जोड़कर देखा जा रहा है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि किसी अज्ञात व्यक्ति या समूह ने जानबूझकर नेता की छवि खराब करने या मजाक के तौर पर यह फर्जी शादी कार्ड तैयार किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल टूल्स और डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर की आसान उपलब्धता के कारण ऐसे फर्जी कार्ड बनाना अब बेहद आसान हो गया है, जिसका गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
पुलिस और साइबर सेल में शिकायत
कांग्रेस नेता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि फर्जी शादी कार्ड बनाने और वायरल करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए कार्ड के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
राजनीति और निजी जीवन पर असर
इस घटना ने ये भी दिखा दिया है कि कैसे साइबर अपराध किसी व्यक्ति के निजी और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। एक जिम्मेदार सार्वजनिक पद से जुड़े व्यक्ति के लिए इस तरह की अफवाह न सिर्फ मानसिक तनाव का कारण बनती है, बल्कि सामाजिक छवि पर भी असर डालती है।
सतर्क रहने की जरूरत
ये मामला आम लोगों के लिए भी चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी जानकारी को बिना पुष्टि के सच न मानें। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच डिजिटल सतर्कता और कानूनी जागरूकता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस फर्जीवाड़े के पीछे की सच्चाई सामने आएगी।
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