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मुंबई लोकल में ‘महा-राहत’: गुड़ी पड़वा पर पश्चिम रेलवे का तोहफा, 12 की जगह अब 15 डिब्बों की दौड़ेंगी ट्रेनें

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मुंबई। चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा के पावन पर्व पर पश्चिम रेलवे ने मुंबई की लाइफलाइन में सफर करने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 19 मार्च, 2026 से अपनी उपनगरीय सेवाओं में बड़ा विस्तार करने का निर्णय लिया है। अब पश्चिम रेलवे की 16 मौजूदा सेवाएं 12 डिब्बों के बजाय 15 डिब्बों के साथ संचालित होंगी।

25% अतिरिक्त क्षमता: भीड़ से मिलेगी मुक्ति

रेलवे के इस कदम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रति ट्रेन यात्रियों की क्षमता में 25 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा। वर्तमान में 12 डिब्बों वाली लोकल में पैर रखने की जगह नहीं होती, लेकिन डिब्बों की संख्या बढ़ने से एक बार में लगभग 1,000 अतिरिक्त यात्री आसानी से सफर कर सकेंगे।

पश्चिम रेलवे का बढ़ता नेटवर्क

पश्चिम रेलवे यात्रियों की सुगमता के लिए लगातार अपने बुनियादी ढांचे को अपग्रेड कर रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:

* वर्तमान स्थिति: पश्चिम रेलवे वर्तमान में प्रतिदिन 15 डिब्बों वाली 211 सेवाएं संचालित करती है।

* नया बदलाव: 16 नई सेवाओं के जुड़ने के बाद अब 15 डिब्बों वाली कुल सेवाओं की संख्या बढ़कर 227 हो जाएगी।

* कुल परिचालन: इससे कुल 1,394 दैनिक सेवाओं की समग्र वहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

प्लेटफॉर्म विस्तार और तकनीकी तैयारी

15 डिब्बों की ट्रेनों को चलाने के लिए पश्चिम रेलवे ने पिछले कुछ समय में युद्ध स्तर पर काम किया है। इसमें शामिल हैं:

* प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाना: अंधेरी, बोरीवली और दादर जैसे व्यस्त स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म का विस्तार किया गया है।

* सिग्नलिंग सिस्टम में सुधार: लंबी ट्रेनों को सुरक्षित दूरी पर चलाने के लिए अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली लागू की गई है।

* योजनाबद्ध संचालन: ये 16 सेवाएं मुख्य रूप से पीक ऑवर्स (व्यस्त समय) के दौरान चलाई जाएंगी ताकि ऑफिस जाने वाले लोगों को अधिकतम लाभ मिल सके।

गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र के लिए नई शुरुआत का प्रतीक है। रेलवे का यह निर्णय न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि सुरक्षित सफर की ओर भी एक बड़ा कदम है।”

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

अब यात्रियों को बोरीवली से चर्चगेट और विरार के बीच लंबी कतारों और दमघोंटू भीड़ से राहत मिलेगी। विशेष रूप से विरार और वसई बेल्ट के यात्रियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, जहां सुबह के समय ट्रेनों में चढ़ना लगभग असंभव होता है।

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